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Navkar Ayurveda �Navkar Aushdhalaya, Bara Dhana Singoli Distt. Neemuch (M.P.)

स्वर्ण प्राशन शुभ आरंभ का श्रेष्ठ अवसरआयुर्वेद में पुष्य नक्षत्र को अत्यंत शुभ और पोषण प्रदान करने वाला माना गया है।1 फर...
27/01/2026

स्वर्ण प्राशन
शुभ आरंभ का श्रेष्ठ अवसर

आयुर्वेद में पुष्य नक्षत्र को अत्यंत शुभ और पोषण प्रदान करने वाला माना गया है।
1 फरवरी को पुष्य नक्षत्र होने से इस दिन स्वर्ण प्राशन का आरंभ करना विशेष रूप से श्रेष्ठ माना जाता है।

इस शुभ नक्षत्र में दिया गया स्वर्ण प्राशन
• रोग प्रतिरोधक क्षमता को अधिक प्रभावी रूप से बढ़ाता है
• बच्चों के मानसिक व बौद्धिक विकास में सहायक होता है
• संस्कार और औषधि दोनों का समन्वय प्रदान करता है

यदि आप अपने बच्चे के दीर्घकालिक स्वास्थ्य, स्मरण शक्ति और संतुलित विकास की मजबूत नींव रखना चाहते हैं, तो पुष्य नक्षत्र से बेहतर अवसर नहीं।

नवकार आयुर्वेदा
बारह ढाणा, सिंगोली
📞 संपर्क: 8358078639

स्वस्थ बचपन, सशक्त भविष्य।

विचार जैसे होंगे, जीवन वैसा ही ढलेगा।मन-मस्तिष्क में उठने वाले विचार यदि शुद्ध हों, तो जीवन में स्थिरता, संतुलन और सकारा...
26/01/2026

विचार जैसे होंगे, जीवन वैसा ही ढलेगा।
मन-मस्तिष्क में उठने वाले विचार यदि शुद्ध हों, तो जीवन में स्थिरता, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा अपने आप प्रवाहित होने लगती है।
लेकिन दूषित विचार व्यक्ति को भीतर से कमजोर करते हैं और पतन की दिशा में ले जाते हैं।
विचारों की शुद्धता का अर्थ केवल सकारात्मक सोचना नहीं है।
इसका मतलब है सत्य, विवेक और संवेदनशीलता के साथ सोचना।
जहां द्वेष, लोभ, अहंकार और अनैतिकता के लिए कोई स्थान न हो।
शुद्ध विचार मानवता, करुणा और नैतिकता की नींव पर खड़े होते हैं।
ऐसे विचार व्यक्ति को भीतर से सुदृढ़ बनाते हैं और समाज को सही दिशा देते हैं।
क्योंकि विचार ही व्यवहार बनते हैं।
और व्यवहार ही हमारे जीवन की पहचान।
— डॉ. सुनील रणावत

23/01/2026

🇮🇳 गणतंत्र भारत | विचार का समय 🇮🇳
भारत की गणतंत्रता का 77वां वर्ष पूरे गौरव और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।
लेकिन एक सवाल आज भी हमारे सामने खड़ा है।
अंग्रेज भारत छोड़ गए, पर क्या उनकी छोड़ी मानसिकता भी हम छोड़ पाए?
आज भी हम अपनी ही राष्ट्रभाषा और अपने ही नाम से दूरी बनाए हुए हैं।
भारत का राजपत्र आज भी The Gazette of India कहलाता है।
भारतीय स्टेट बैंक आज भी State Bank of India लिखा जाता है।
क्या यह केवल नाम हैं?
या फिर हमारी सोच की दिशा का संकेत?
जब हम विश्वगुरु बनने की बात करते हैं, तो क्यों न शुरुआत अपने नाम से करें।
India नहीं, भारत।
भारत कोई नया शब्द नहीं, यह हमारी पुरातन परंपरा, पहचान और सम्मान का प्रतीक है।
आइए, गणतंत्र के इस पर्व पर
शब्दों से ही सही,
पर आत्मसम्मान की ओर एक कदम बढ़ाएं।
भारत कहें। भारत बनें। 🇮🇳
— सुनील रणावत

शास्त्रोक्त विधि से निर्मित च्यवनप्राशजब च्यवनप्राश अपनी मूल आयुर्वेदिक पद्धति से तैयार होता है, तो उसका स्वभाव ही बदल ज...
21/01/2026

शास्त्रोक्त विधि से निर्मित च्यवनप्राश
जब च्यवनप्राश अपनी मूल आयुर्वेदिक पद्धति से तैयार होता है, तो उसका स्वभाव ही बदल जाता है। इसमें सिर्फ स्वाद नहीं, जड़ों और वनौषधियों की पूरी शक्ति शामिल होती है।

क्यों है यह च्यवनप्राश अलग और बेहतर?
• आंवला, दशमूल, असगंध, पीपली, इलायची और घी जैसी द्रव्यों का प्रयोग उसी क्रम में किया जाता है, जैसा शास्त्र बताते हैं।
• किसी भी तरह के फ्लेवर, परिरक्षक या कृत्रिम रंग शामिल नहीं किए जाते।
• पकाने की प्रक्रिया धीमी रहती है, जिससे औषधीय गुण पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।
• हर बैच सीमित मात्रा में बनाया जाता है, ताकि गुणवत्ता नियंत्रित रहे।

मुख्य फायदे
• शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है।
• सांस व श्वसन तंत्र को सहारा देता है।
• पाचन सुधरता है और बल–ओज बढ़ता है।
• सर्दी के मौसम में ऊर्जा और गर्माहट बनाए रखने में मदद करता है।
• बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए खास रूप से उपयोगी।

यह च्यवनप्राश बाजार में मिलने वाले साधारण उत्पादों जैसा नहीं है। यह समय, श्रम और परंपरा से बने एक विश्वसनीय आयुर्वेदिक योग का अनुभव देता है।

यह शोध एक महत्वपूर्ण संकेत देता है कि समाधान अक्सर हमारी परंपराओं में ही छिपे होते हैं। बांस की कोपलें केवल लोकभोजन नहीं...
20/01/2026

यह शोध एक महत्वपूर्ण संकेत देता है कि समाधान अक्सर हमारी परंपराओं में ही छिपे होते हैं। बांस की कोपलें केवल लोकभोजन नहीं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली की कई बीमारियों का प्राकृतिक उत्तर बन सकती हैं। शुगर नियंत्रण, हृदय स्वास्थ्य और पाचन सुधार जैसे लाभ बताते हैं कि “सुपरफूड” का अर्थ आयातित या महंगा होना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से सिद्ध और संतुलित होना है।
ज़रूरत इस बात की है कि हम ऐसे पारंपरिक, स्थानीय और पोषण-संपन्न विकल्पों को सही तरीके से अपनाएं और भोजन को फिर से स्वास्थ्य का माध्यम बनाएं, केवल स्वाद का नहीं।

अमरूद के फायदे: स्वाद भी, सेहत भीअमरूद एक ऐसा फल है जो सस्ता, आसानी से उपलब्ध और पोषण से भरपूर है। अक्सर लोग इसे हल्के म...
18/01/2026

अमरूद के फायदे: स्वाद भी, सेहत भी

अमरूद एक ऐसा फल है जो सस्ता, आसानी से उपलब्ध और पोषण से भरपूर है। अक्सर लोग इसे हल्के में लेते हैं, जबकि यह शरीर के लिए किसी प्राकृतिक टॉनिक से कम नहीं। आयुर्वेद से लेकर आधुनिक पोषण विज्ञान तक, दोनों अमरूद के गुणों को स्वीकार करते हैं।

एक मध्यम आकार का अमरूद रोज की जरूरत से भी ज्यादा विटामिन C देता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है, सर्दी-खांसी से बचाव करता है और शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है।

अमरूद में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है। यह कब्ज की समस्या में राहत देता है, आंतों को सक्रिय रखता है और पाचन को दुरुस्त बनाता है। अमरूद के पत्तों का काढ़ा भी पेट की कई समस्याओं में उपयोगी माना गया है।

कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स के कारण अमरूद रक्त शर्करा को तेजी से नहीं बढ़ाता। सही मात्रा में सेवन करने पर यह मधुमेह रोगियों के लिए भी सुरक्षित और लाभकारी है।

अमरूद में मौजूद पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स रक्तचाप को संतुलित रखने में मदद करते हैं। इससे हृदय रोगों का खतरा कम हो सकता है।

विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को चमकदार बनाते हैं, झुर्रियों की गति को धीमा करते हैं और बालों की जड़ों को मजबूती देते हैं। अमरूद के पत्तों का पानी बालों के लिए भी उपयोगी माना जाता है।

कम कैलोरी और अधिक फाइबर होने के कारण अमरूद पेट को लंबे समय तक भरा रखता है। यह अनावश्यक भूख को कम करता है और वजन घटाने में मदद कर सकता है।

अमरूद को अच्छी तरह धोकर छिलके सहित खाना सबसे बेहतर होता है। अधिक नमक या मसाले डालकर खाने से इसके लाभ कम हो सकते हैं।

अमरूद केवल एक फल नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सेहत का भरोसेमंद साथी है। मौसम में उपलब्ध इस फल को अपने आहार में शामिल करना एक छोटा सा कदम है, जो लंबे समय तक बड़े फायदे देता है।

सेहत के लिए शानदार सर्दी का मौसम— सुनील रणावतसर्दी का मौसम सिर्फ ठंड का नाम नहीं है, यह शरीर को दुरुस्त करने का सबसे अनु...
16/01/2026

सेहत के लिए शानदार सर्दी का मौसम
— सुनील रणावत

सर्दी का मौसम सिर्फ ठंड का नाम नहीं है, यह शरीर को दुरुस्त करने का सबसे अनुकूल समय भी है। आयुर्वेद की दृष्टि से यह वह ऋतु है जब पाचन शक्ति मजबूत होती है, भूख स्वाभाविक रूप से बढ़ती है और शरीर पोषण को बेहतर ढंग से ग्रहण करता है। सही आहार और दिनचर्या अपनाई जाए, तो सर्दी पूरे वर्ष की सेहत की नींव रख सकती है।
ठंड में शरीर की अग्नि प्रबल रहती है। इसी कारण इस मौसम में पौष्टिक और ऊर्जा देने वाले भोजन आसानी से पच जाते हैं। घी, तिल, मूंगफली, गुड़, बाजरा, ज्वार, गेहूं, सूखे मेवे और मौसमी सब्जियां शरीर को बल देती हैं। सूप, दलिया, खिचड़ी और हल्का गरम भोजन न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है।
सुबह की हल्की धूप सर्दी की सबसे बड़ी सौगात है। कुछ समय धूप में बैठना विटामिन डी की पूर्ति करता है, हड्डियों को मजबूत बनाता है और मन को भी प्रसन्न रखता है। इस मौसम में नियमित व्यायाम, योग और प्राणायाम करने से शरीर में जकड़न नहीं आती और आलस्य दूर रहता है।
सर्दी में नींद भी गहरी और सुकूनभरी होती है। यह शरीर की मरम्मत का समय होता है। रात को समय पर सोना और सुबह जल्दी उठना दिनभर स्फूर्ति बनाए रखता है। गुनगुने पानी से स्नान और तिल या सरसों के तेल से हल्की मालिश त्वचा को रूखेपन से बचाती है और रक्तसंचार बेहतर करती है।
हालांकि ठंड में लापरवाही भी जल्दी नुकसान पहुंचा सकती है। अत्यधिक ठंडे पेय, देर रात जागना और बहुत ज्यादा तला-भुना भोजन सर्दी-जुकाम, जोड़ों के दर्द और पाचन समस्याओं को बढ़ा सकता है। संतुलन ही सर्दी की असली कुंजी है।
कुल मिलाकर, सर्दी का मौसम शरीर को मजबूत करने, रोगों से बचाने और नई ऊर्जा पाने का सुनहरा अवसर है। थोड़ी समझदारी और अनुशासन के साथ यह मौसम सेहत का सबसे अच्छा मित्र बन सकता है।

🪶 पथरी: छोटी सी लेकिन बड़ी परेशानी!नवकार आयुर्वेदा, सिंगोली द्वारा जनजागरण संदेश 🌿कई बार पेट या पीठ के निचले हिस्से में ...
14/01/2026

🪶 पथरी: छोटी सी लेकिन बड़ी परेशानी!
नवकार आयुर्वेदा, सिंगोली द्वारा जनजागरण संदेश 🌿
कई बार पेट या पीठ के निचले हिस्से में अचानक उठने वाला असहनीय दर्द, उल्टी, जलन या पेशाब में तकलीफ़ — ये सब संकेत हो सकते हैं किडनी या पित्ताशय में पथरी के।
आधुनिक जीवनशैली, पानी की कमी, और अधिक तली-भुनी चीज़ों का सेवन इसके प्रमुख कारण हैं।
👉 आयुर्वेद के अनुसार, पथरी केवल शरीर में नहीं, बल्कि असंतुलित दोषों का परिणाम है।
नवकार आयुर्वेदा, सिंगोली में आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों, पंचकर्म और आहार-संशोधन द्वारा
🔹 पथरी के दर्द को प्राकृतिक रूप से कम किया जाता है,
🔹 मूत्रमार्ग से पथरी के निष्कासन में मदद की जाती है,
🔹 और दोबारा पथरी बनने से बचाव पर ध्यान दिया जाता है।
💧 पानी सही मात्रा में पिएं, शरीर को डिटॉक्स रखें और समय पर जांच करवाएं।
प्रकृति के निकट रहें – आयुर्वेद अपनाएं। 🌱
📍 नवकार आयुर्वेदा, सिंगोली
— “स्वस्थ जीवन की ओर एक प्राकृतिक कदम” 🌿

यह खबर साफ संकेत देती है कि डायबिटीज अब केवल स्वास्थ्य की नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे की भी गंभीर च...
13/01/2026

यह खबर साफ संकेत देती है कि डायबिटीज अब केवल स्वास्थ्य की नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे की भी गंभीर चुनौती बन चुकी है। इलाज पर बढ़ता खर्च, कामकाजी उत्पादकता में गिरावट और परिवारों पर बढ़ता आर्थिक बोझ हमें चेताता है कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय पर जांच को जन-आंदोलन बनाना अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता है।

युवाओं में बढ़ता नशा: एक गंभीर चेतावनीआज का युवा वर्ग खुशियों और आधुनिकता के नाम पर शराब और सिगरेट को सामान्य मानने लगा ...
11/01/2026

युवाओं में बढ़ता नशा: एक गंभीर चेतावनी
आज का युवा वर्ग खुशियों और आधुनिकता के नाम पर शराब और सिगरेट को सामान्य मानने लगा है। दिखावे, दौलत और रसूख की होड़ में यह सच भुलाया जा रहा है कि नशा अंततः नाश की ओर ले जाता है।
हाल की सड़क दुर्घटनाएं इस कड़वी सच्चाई की याद दिलाती हैं, जहां नशे और तेज रफ्तार ने कई निर्दोष जिंदगियां छीन लीं।
दुख यह है कि न समाज समय रहते ठोस हस्तक्षेप कर पा रहा है, न परिजन खुलकर दिशा दिखा पा रहे हैं। हमने सुविधाएं दीं, पर संस्कार और संयम पीछे छूट गए। आज युवाओं को असीम आजादी नहीं, सही मार्गदर्शन और समय पर हस्तक्षेप की जरूरत है।

समाधान भी है।
नशा छुड़वाने के लिए नवकार आयुर्वेदा, सिंगोली पर प्रभावी आयुर्वेदिक दवा उपलब्ध है। आवश्यकता पड़ने पर नशा करने वाले को बताए बिना भी यह दवा दी जा सकती है। दवा का न कोई स्वाद होता है और न कोई रंग, इसलिए इसे भोजन या पेय पदार्थ में आसानी से मिलाकर दिया जा सकता है।
अब भी समय है। संवाद, मार्गदर्शन और सही उपचार से जीवन की दिशा बदली जा सकती है।
— डॉ. सुनील रणावत

विश्व हिंदी दिवसहिंदी केवल एक भाषा नहीं, हमारी सोच, संवेदना और संस्कृति की आत्मा है।यह जोड़ती है दिलों को, सरल शब्दों मे...
10/01/2026

विश्व हिंदी दिवस
हिंदी केवल एक भाषा नहीं, हमारी सोच, संवेदना और संस्कृति की आत्मा है।
यह जोड़ती है दिलों को, सरल शब्दों में गहरी बात कहती है और हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखती है।
आज के दिन संकल्प लें कि
बोलचाल में, लेखन में और डिजिटल दुनिया में
हिंदी को सम्मान भी दें और स्थान भी।
हिंदी है तो पहचान है।
हिंदी है तो आत्मसम्मान है।
विश्व हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
— सुनील रणावत

दूध पीने का सही समय— सुनील रणावतदूध को संपूर्ण आहार कहा गया है, लेकिन इसका पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे सही समय और सही त...
08/01/2026

दूध पीने का सही समय
— सुनील रणावत

दूध को संपूर्ण आहार कहा गया है, लेकिन इसका पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे सही समय और सही तरीके से पिया जाए। अक्सर लोग पूछते हैं कि दूध सुबह पीना बेहतर है या रात में। इसका उत्तर व्यक्ति की उम्र, पाचन शक्ति और उद्देश्य पर निर्भर करता है।

सुबह का समय शरीर के लिए सक्रियता का होता है। जिन लोगों की पाचन शक्ति अच्छी है, वे यदि सुबह दूध पीते हैं तो यह शरीर को ऊर्जा देता है और दिनभर की थकान से बचाता है। बच्चों, युवाओं और मेहनत करने वाले लोगों के लिए सुबह दूध उपयोगी माना जाता है। बेहतर है कि दूध उबालकर हल्का गुनगुना पीया जाए और उसके साथ नमकीन या खट्टे पदार्थ न लिए जाएं।

रात में दूध पीना अधिकतर लोगों के लिए लाभकारी माना गया है। यह मन को शांत करता है, नींद को गहरा बनाता है और शरीर की मरम्मत प्रक्रिया में सहायता करता है। जिन लोगों को तनाव, अनिद्रा या कमजोरी की समस्या रहती है, उनके लिए रात का दूध विशेष लाभ देता है। रात में दूध हमेशा गर्म और सोने से करीब आधा घंटा पहले पीना बेहतर रहता है।

यदि किसी को गैस, एसिडिटी या भारीपन की समस्या रहती है तो दूध पीने का समय और मात्रा दोनों पर ध्यान देना जरूरी है। ऐसे लोग दूध में थोड़ा सा सौंठ या हल्दी मिलाकर पी सकते हैं। ठंडे दूध से बचना चाहिए, खासकर रात में।

दूध का सही समय कोई एक नहीं है। सुबह दूध ऊर्जा और ताकत देता है, जबकि रात में दूध शांति और विश्राम प्रदान करता है। सबसे जरूरी बात यह है कि दूध आपकी पाचन क्षमता के अनुकूल हो और सही तापमान पर लिया जाए। सही समय पर लिया गया दूध ही वास्तव में अमृत के समान लाभ देता है।

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