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25/11/2018

फैटी लिवर में इन चीजों का करें सेवन

1. कॉफ़ी

फैटी लिवर से ग्रस्त लोगों पर हुए एक अध्यन में पता चला है कि कॉफ़ी ना पीने वाले लोगों की अपेक्षा कॉफ़ी पीने वाले लोगों में इस बीमारी की वजह से लिवर को कम नुक्सान पहुंचा है. माना जाता है कि कॉफ़ी में मौजूद कैफीन एब्नार्मल लिवर एंजाइम्स की मात्रा कम कर देता है जिस वजह से लिवर को कम नुक्सान पहुँचता है.

2. हरी सब्जियां

ब्रोकोली, पालक, पत्ता गोभी, को अपने आहार का भाग बनाएं. यह आपका वजन कम करने में मदद करती हैं और इस तरह फैटी लिवर के एक बड़े कारण को कण्ट्रोल में रखती हैं.

पढ़ें: मोटापा कम करने के 7 योगासन

3. टोफू

एक अमेरिकी यूनिवर्सिटी द्वारा चूहों पर किये गए अध्यन में पता चला है कि टोफू में पाया जाने वाला soy protein लिवर में जमा फैट को कम करने में कारगर है. इसके अलावा, टोफू में फैट कम होता है और प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है.

4. मछलियाँ

Salmon, sadines, tuna और trout मछलियों में ओमेगा- 3फैटी एसिड अधिक पाया जाता है. Omega-3 fatty acids लिवर में फैट का लेवल इम्प्रूव करने में सहायक हैं और ये inflammation भी कम करते हैं.

5. ओटमील

Oatmeal (दलिया) में मौजूद कार्बोहाइड्रेट्स आपके शरीर को उर्जा देते हैं और इनमे मौजूद फाइबर आपका पेट भर देता है और इस तरह यह आप अपना वजन सही रखने सहायक है.

6. अखरोट

अखरोट में omega-3 fatty acids की मात्रा अधिक होती है. एक अध्यन में पाया गया है कि अखरोट खाने से फैटी लिवर बीमारी से ग्रास्त लोगों के लिवर फंक्शन टेस्ट में सुधार आया है.

7. एवोकैडो

Avocado में प्रचुर मात्र में healthy fats पाए जाते हैं और रिसर्च बताती है कि उनमे कुछ ऐसे कैमिकल्स होते हैं जो लिवर डैमेज को धीमा कर सकते हैं. साथ ही ये एक fibre rich fruit है जो वजन कण्ट्रोल करने में भी मददगार है.

8. सूरजमुखी के बीज

एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर सूरजमुखी के बीजों में vitamin E अधिक मात्रा में पाया जाता है और लिवर को और भी अधिक खराब होने से रोक सकता है.

9. ओलिव ऑयल

Olive oil में ओमेगा -3 फैटी एसिड्स होते हैं. ये cooking के लिए margarine या butter से बेहतर होता है. रिसर्च में पता चला है कि ये लिवर एंजाइम को कम करने और वेट कण्ट्रोल करने में मददगार है.

10. लहसुन

कुछ स्टडीज में पाया गया है कि फैटी लिवर डिजीज से ग्रस्त लोगों में गार्लिक पाउडर वजन व फैट कम करने में सहायक है.

11. ग्रीन टी

Green tea अपने आप में बहुत फायदेमंद है और साइंटिस्ट्स इसके “fat absorption” को कम करने के रोल पर अध्यन कर रहे हैं. कुछ एनिमल्स पर हुई स्टडी में पाया गया है कि ग्रीन टी का सेवन डाइट से वसा अवशोषण को कम कर सकता है.

फैटी लिवर में इन चीजों से दूर रहें

यदि आपको फैटी लिवर है तो निश्चित रूप से आपको ऐसे फ़ूड आइटम्स से दूर रहना चाहिए जो आपके ब्लड सुगर या वेट को बढाने में सहायक हैं. इन खाद्य व पेय पदार्थों को अवॉयड करें.

1. शराब

शराब फैटी व अन्य लिवर डिजीज का मुख्य कारण है, इससे दूर रहे .

पढ़ें: शराब की लत – कारण, लक्षण, नुकसान एवं छोड़ने के उपाय

2. ऐडेड सुगर वाली चीजें

कोल्ड ड्रिंक, फ्रूट जूस, सोडा, टॉफ़ी, कूकीज इत्यादि. हाई ब्लड सुगर लिवर में fat buildup बढाता है इसलिए ऐडेड सुगर वाली चीजों से दूर रहें.

पढ़ें: डायबिटीज के 10 प्रमुख लक्षण और उनकी वजहें

3. फ्राइड फूड्स

तले हुए भोजन से बचें क्योंकि इनमे बहुत अधिक फैट और कैलोरीज होती हैं.

4. नमक

अधिक नमक खाना आपकी बॉडी में ज़रूरत से अधिक पानी रोक सकता है. इसलिए नमक कम खाएं.

5. कम फाइबर वाली चीजें

वाइट ब्रेड, पास्ता- इन चीजों में फाइबर कम होता है और ये highly processed आटे से बने होते है जो आपका ब्लड सुगर बढ़ा सकता है.

6. रेड मीट

रेड मीट जैसे कि मटन, पोर्क इत्यादि में अधिक मात्रा में saturated fat होता है. फैटी लिवर से ग्रस्त लोगों को इनका सेवन नहीं करना चाहिए.

इन खान-पान की चीजों का ध्यान रखने के अलावा आपको फैटी लिवर treat करने के लिए इन बातों का भी ध्यान रखना चाहिए-

Active रहें– रोज एक्सरसाइज करें, टहलने जाएं या जिम ज्वाइन करें. रोज कम से कम 30 मिनट अपनी बॉडी को फिट रखने में लगाएं.कोलेस्ट्रोल कम करें- यदि खान-पान पर ध्यान देने और रेगुलर एक्सरसाइज के बावजूद आपका cholesterol level सही नहीं रह रहा हो तो डॉक्टर से इसका उचित इलाज कराएं.डायबिटीज को नियंत्रण में रखें- अक्सर Diabetes और fatty liver disease साथ में हो जाती हैं. खाने में परहेज और नियमित व्ययाम इन दोनों को कंट्रोल करने के लिए ज़रूरी है. साथ ही डॉक्टर की सलाह पर दवाएं ज़रूर लें. (DR.BALMUKUND MAURYA MOTC सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुड़वार SULTANPUR

25/11/2018

‬: आप सभी माता-पिता अपने 9 माह से 15 साल तक के बच्चों को मिजिल्स-रूबेला का टीका जरूर लगवाये जो 26 नवम्बर से सभी सरकारी एवम् प्राइवेट स्कूलों में निःशुल्क लगाया जायेगा।
मिजिल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान 26 नवम्बर 2018 से kurwar sultanpur me.

16/11/2018

T DR BALMUKUND MAURYA CHC KURWAR खसरा के कारण, लक्षण, इलाज एवं बचाव .--- टीकाकरण से बहुत आसानी तरीके हो सकता है 9 महीने से लेकर 15 साल तक के सभी बच्चों का टीकाकरण सरकारी अभियान 26 nov .से कुरवार मे लगाया जाएगा.....^_^
खसरा (khasra) एक वायरल इंफेक्शन है जो श्वसन तंत्र (respiratory system) में होता है। यह एक संक्रामक बीमारी मानी जाती है और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमित श्लेष्म (mucus) या लार (saliva) के जरिए फैलती है। यह बीमारी आमतौर पर बच्चों को होती है। एक संक्रमित व्यक्ति के छींकने और कफ के माध्यम से संक्रमण हवा में फैल जाता है और उस हवा में सांस (breath) लेने से दूसरा व्यक्ति भी बहुत आसानी से इस बीमारी के चपेट में आ जाता है। खसरा बच्चों में मौत का सबसे बड़ा कारण है और हर साल हजारों बच्चे इस बीमारी की चपेट में आकर मर जाते हैं। इस संक्रमण के शुरूआत में मस्तिष्क की कोशिकाओं (brain cell) में सूजन आ जाता है और बाद में समस्या गंभीर होने पर कई सालों बाद व्यक्ति का मस्तिष्क क्षतिग्रस्त हो सकता है.

खसरा के कारण –
Khasra/ खसरा एक बेहद संक्रामक बीमारी है जो पैरामिक्जो वायरस (paramyxovirus) के कारण होती है। यह संक्रमित व्यक्ति के कफ, छींकने, सांस लेने और नाक बहने के कारण छोटी-छोटी बूंदों (droplets) के जरिए दूसरे व्यक्ति में भी फैल जाती है। इसके अलावा वायरस के संपर्क में आने के बाद मुंह में उंगली डालने, नाक रगड़ने, आंखों को छूने से भी संक्रमण फैल जाता है जिसके कारण व्यक्ति खसरे से पीड़ित हो जाता है। लगभग 90 प्रतिशत लोग दूसरे व्यक्ति में यह वायरस होने से उसके संपर्क में आने के कारण इस समस्या से ग्रसित हो जाते हैं। लेकिन इंफ्लूएंजा वायरस के विपरित खसरा उत्पन्न करने वाले वायरस लंबे समय तक जिंदा नहीं रहते हैं। यह हवा में उत्पन्न होते हैं और अधिक संक्रामक होते हैं।

खसरा का संक्रमण निम्न कारणों से फैलते हैं।

किसी वस्तु में वायरस उत्पन्न होने के दो घंटे के भीतर उसे छूने सेसंक्रमित व्यक्ति (infected person) के शारीरिक संपर्क में आने सेसंक्रमित व्यक्ति के कफ, लार, नाक के पानी से संक्रमित जगह को हाथों से छूने या उसके संपर्क में आने से।

एक स्टडी में पाया गया है कि खसरे का टीका (vaccine) लगवाये बिना यदि कोई व्यक्ति खसरा से पीड़ित मरीज के साथ रहता है तो ऐसे सिर्फ 10 प्रतिशत लोगों में ही खसरा होने की संभावना नहीं होती है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। उसे डायरिया, उल्टी, आंख में संक्रमण और कान में संक्रमण, हेपेटाइटिस सहित कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

खसरा के लक्षण –
आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के लगभग 14 दिनों बाद खसरा के लक्षण उत्पन्न होने लगते हैं। शुरूआत में प्रायः सिर्फ हल्का बुखार आता है लेकिन बाद में यह गंभीर हो जाता है और कई दिनों तक बना रहता है। लेकिन जब शरीर पर लाल चकते (rash) दिखायी देने लगते हैं तब बुखार लगातार नहीं बना रहता है। खसरा के लक्षण निम्न हैं।

गले में कफ बननाबुखार आनाआंखें लाल होनाप्रकाश के प्रति संवेदनशील होनामांसपेशियों में दर्दनाक बहनागले में खराश (sore throat)मुंह के अंदर सफेद धब्बे पड़ जानाआंखों से पानी बहना और झींक आना

इसके अलावा कान के पीछे लाल चकते (red rashes) उभर आते हैं जो सिर एवं गर्दन तक फैल जाते हैं। कुछ दिनों के बाद ये लाल चकते पैरों सहित पूरे शरीर पर फैल जाते हैं। जैसे-जैसे ये लाल चकते बढ़ते जाते हैं आपस में मिलकर पूरे शरीर को घेर लेते हैं। इस स्थिति में शरीर में खुजली शुरू हो जाती है।

खसरा का निदान –
डॉक्टर आमतौर पर मरीज के शरीर में लक्षणों को देखकर ही खसरे का निदान करते हैं। इसके अलावा शरीर में रूबेला वायरस का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट भी किया जाता है। डॉक्टर मरीज का शारीरिक परीक्षण करते हैं और बुखार, शरीर पर चकत्ते, कफ, छींकने, और आंखें लाल होने जैसे लक्षणों का गहन जांच करने के बाद खसरा होने की पुष्टि करते हैं।
खसरा का इलाज –
Khasra का कोई विशिष्ट (specific) उपचार नहीं किया जाता है। लेकिन यदि यह बीमारी अधिक गंभीर न हो तो डॉक्टर आमतौर पर पर्याप्त आराम और भरपूर मात्रा में तरल पदार्थ (fluids) लेने की सलाह देते हैं ताकि शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाया जा सके। खसरा के लक्षण आमतौर पर 7 से 10 दिनों के अंदर खत्म हो जाते हैं।

खसरा के लिए कुछ सामान्य से इलाज मौजूद हैं। पीड़ित मरीज के शरीर के तापमान को कम करने के लिए उसे टिलेनॉल (Tylenol) या इबुप्रोफेन (ibuprofen) नामक दवा दी जाती है जो बुखार, दर्द औऱ शरीर में ऐंठन को नियंत्रित करने में मदद करता है। यदि खसरा से पीड़ित बच्चा 16 साल से कम उम्र का हो तो उसे एस्प्रीन नहीं देना चाहिए।

इसके अलावा मांसपेशियों में दर्द को नियंत्रित करने के लिए एसिटामिनोफेन (acetaminophen) नामक दवा दी जाती है। पर्याप्त पानी पीने सहित विटामिन ए युक्त खाद्य पदार्थ पर्याप्त मात्रा में लेने की सलाह डॉक्टर देते हैं। यदि 12 महीने से अधिक उम्र का बच्चा खसरा से पीड़ित हो तो उसे एक गिलास गर्म पानी में नींबू का रस और दो चम्मच शहदमिलाकर पिलाएं। लेकिन बच्चा दो साल से भी कम उम्र का हो तो उसे शहद (honey) न खिलाएं। 2 साल से कम उम्र के बच्चे को विटामिन ए युक्त पूरक आहार (supplements) खिलाएं। यह खसरे के लक्षणों को कम करने में बहुत मदद करता है।

खसरा में क्या खाना चाहिए – अंगूर, संतरे और नींबू की तरह विटामिन सी में समृद्ध खाद्य पदार्थ का सेवन करना उपयोगी होता है।पालक, हरे पत्तेदार सब्जियों आदि जैसे विटामिन ए में समृद्ध उत्पादों का उपभोग करें।रोगी को एक नरम आहार दिया जाना चाहिए जिसमें फल, अनाज, और ब्लेंड सूप शामिल हों।½ कप पानी, थोड़ा अदरक, मीठी तुलसी (तुलसी) और पुदीना की 2-3 पत्तियों को उबालकर लिया जा सकता है इस मिश्रण से प्रतिरक्षा तंत्र में वृद्धि की जा सकती है।खसरा में क्या नहीं खाना चाहिए –

जैसा की आपने जाना कुछ खाद्य पदार्थ खसरा रोगियों के लिए अच्छे हैं, लेकिन कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ भी हैं जो इस स्थिति को और भी खराब बना सकते हैं।
इसलिए सभी गंभीर जटिलताओं से बचने के लिए उचित देखभाल की जानी चाहिए। और साथ ही इन खाद्य पदार्थों से बचा जाना चाहिए:

तला हुआ खानाजंक फूड,प्रोसेस्ड फ़ूडभारी मांसमसाले तेलवाष्पित पेयमिठाई और नमकीन नाश्ताचिकना खाना,फैटी खाद्य पदार्थ, और संसाधित वस्तुओं से बचने की कोशिश करें।कैफीन युक्त और मीठे पेय न लें।

इन उपरोक्त खाद्य पदार्थों को पचाने में मुश्किल होती है, इसलिए इसे खसरा रोगी द्वारा सख्ती से बचा जाना चाहिए ..
खसरा का आयुर्वेदिक घरेलू उपचार –
दिन के दौरान नियमित अंतराल पर संतरे या नींबू का रस पीएं। इन फलों का खट्टे स्वाद संक्रमण के कारण भूख में आयी कमी को समाप्त कर सकता है। नींबू और नारंगी के रस भी निर्जलीकरण को कम करने और विटामिन सी सामग्री के साथ प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। शहद या दूध के साथ हल्दी पाउडर को मिलाकर पीने से खसरा को ठीक करने में सहायता मिल सकती है, क्योकि यह प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ावा देती है। खांसी और गले की खरास को कम करने के लिए बच्चों को शहद के साथ लाइसोरिस पाउडर (licorice) मिलाकर दिया जा सकता है। (और पढ़े – डिहाइड्रेशन से बचने के घरेलू उपाय, जानलेंगें तो कभी नहीं होगी पानी की कमी…)

जौ का पानी खसरा के दौरान शुष्क, और भारी खांसी के खिलाफ राहत प्रदान कर सकता है साथ ही जौ के पानी से स्नान त्वचा की जलन को शांत कर सकता है और खुजली को कम कर सकता है। जैसे ही स्थिति में सुधार होता है, बच्चे को कुछ दिनों के लिए फल आहार पर रखा जा सकता है। इसके बाद बच्चे को नियमित रूप से भोजन दिया जा सकता है, लेकिन वह बहुत संतुलित मात्रा में होना चाहिए। इन फलों के माध्यम से उपलब्ध विटामिन के साथ ताजा फल और सब्जियों का सेवन, खसरा जैसी बीमारी से वापसी में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ..
खसरा से बचाव – चूंकि खसरा एक संक्रामक बीमारी है इसलिए इस बीमारी से बचाव करना बहुत जरूरी है ताकि यह संक्रमण अन्य व्यक्तियों में न फैले। आइये जानते हैं कि खसरा से किस तरह बचाव किया जा सकता है।

यदि घर में कोई व्यक्ति खसरा से पीड़ित हो तो घर के दूसरे समस्यों को उसके संपर्क से दूर रखें।Khasra से बचने के लिए हर व्यक्ति को खसरा का वैक्सीन (टीका) लगवाना चाहिए ताकि किसी संक्रमित (infected) व्यक्ति के संपर्क में आने से उसे यह बीमारी न हो।जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर है उन्हें इम्युनिटी बढ़ाने के उपाय करने चाहिए अन्यथा वे बहुत जल्द ही इस बीमारी के चपेट में आ सकते हैं
[] Dr. balmukund maurya:
26 NOV 2018 से टीकाकरण आरंभ हो रहा है 9 महीने से लेकर 15 वर्ष तक के सभी बच्चों को टीका लगाया जाएगा आप लोगों का सहयोग से ही इस आयु वर्ग के बच्चों को बचाया जा सकता है हमारा उद्देश्य स्वस्थ समाज एवं खुशहाल जिंदगी ...

10/12/2017
10/12/2017

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Sultanpur
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