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शाम्भवी मुद्रा विधि
03/04/2026

शाम्भवी मुद्रा विधि

ये खाना जरूरी है अच्छी सेहत हैं।
03/04/2026

ये खाना जरूरी है अच्छी सेहत हैं।

🚽✨ कब्ज से राहत पाने का देसी और आसान तरीका (इंडियन स्टाइल)👉 अगर आपको बार-बार कब्ज की समस्या रहती है, तो यह प्राकृतिक तरी...
03/04/2026

🚽✨ कब्ज से राहत पाने का देसी और आसान तरीका (इंडियन स्टाइल)
👉 अगर आपको बार-बार कब्ज की समस्या रहती है, तो यह प्राकृतिक तरीका बेहद फायदेमंद हो सकता है।
✨ फायदे:
💨 पेट पर प्राकृतिक दबाव बनता है
😌 आंतों की सफाई बेहतर होती है
🌿 मल त्याग आसान हो जाता है
⚡ कब्ज की समस्या धीरे-धीरे कम होती है
🛡️ पेट हल्का और साफ महसूस होता है
🌿 इस्तेमाल करने का तरीका:
1️⃣ इंडियन स्टाइल (उकड़ूं बैठकर) शौच करें 🚽
2️⃣ रीढ़ को थोड़ा सीधा रखें
3️⃣ धीरे-धीरे और बिना जोर लगाए प्रक्रिया पूरी करें
⏰ कब करें:
👉 रोज सुबह खाली पेट करें
👉 नियमित आदत बनाने से ज्यादा फायदा मिलता है
⚠️ सावधानियां:
❗ ज्यादा जोर न लगाएं
❗ घुटनों या जोड़ों में दर्द हो तो सावधानी रखें
❗ गंभीर कब्ज होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें
💡 टिप:
👉 सुबह गुनगुना पानी पिएं 💧
👉 फाइबर युक्त आहार (फल-सब्जियां) लें

मानव शरीर के ७ मुख्य चक्रनीचे से ऊपर की ओर, ये चक्र हमारी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्थिति को दर्शाते हैं:मूलाधार (R...
03/04/2026

मानव शरीर के ७ मुख्य चक्र
नीचे से ऊपर की ओर, ये चक्र हमारी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्थिति को दर्शाते हैं:
मूलाधार (Root Chakra): रीढ़ के आधार पर स्थित, यह अस्तित्व और सुरक्षा का केंद्र है।
स्वाधिष्ठान (Sacral Chakra): सृजनात्मकता और भावनाओं का केंद्र।
मणिपुर (Solar Plexus Chakra): आत्मविश्वास और व्यक्तिगत शक्ति का केंद्र।
अनाहत (Heart Chakra): हृदय में स्थित, प्रेम और करुणा का केंद्र।
विशुद्धि (Throat Chakra): अभिव्यक्ति और सत्य बोलने का केंद्र।
आज्ञा चक्र (Third Eye Chakra): माथे के बीच में स्थित, अंतर्ज्ञान और स्पष्टता का केंद्र।
ब्रह्मरंध्र / सहस्रार (Crown Chakra): सिर के सबसे ऊपरी भाग में, जो हमें अनंत और परमात्मा से जोड़ता है।
आध्यात्मिक अर्थ
अनंत, महाशून्य, परम समाधि: यह उस अवस्था को दर्शाता है जहाँ व्यक्ति संसार के बंधनों से मुक्त होकर सर्वोच्च चेतना में विलीन हो जाता है।
ऊर्जा का ऊर्ध्वगमन: चित्र के नीचे लिखा संदेश बताता है कि यह केवल एक कल्पना नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव है। यह अंधकार (अज्ञान) से प्रकाश (आत्मज्ञान) की ओर जाने का मार्ग है।

जुंबा, जिम और एरोबिक्स जैसे  विदेशी व्यायाम से बढ़ रहा है फ्रोजन शोल्डर, सर्वाइकल, स्पॉन्डिलाइटिस, घुटने दर्द, जोइंट प्र...
03/04/2026

जुंबा, जिम और एरोबिक्स जैसे विदेशी व्यायाम से बढ़ रहा है फ्रोजन शोल्डर, सर्वाइकल, स्पॉन्डिलाइटिस, घुटने दर्द, जोइंट प्रॉब्लम व कमर दर्द का खतरा,

सर्वांगासन (Sarvangasana) योग का एक महत्वपूर्ण उल्टा आसन (Inversion Pose) है, जिसे “शोल्डर स्टैंड” भी कहा जाता है। नीचे ...
02/04/2026

सर्वांगासन (Sarvangasana) योग का एक महत्वपूर्ण उल्टा आसन (Inversion Pose) है, जिसे “शोल्डर स्टैंड” भी कहा जाता है। नीचे इसकी पूरी जानकारी उसी स्टाइल में दी गई है:
🔶 सर्वांगासन क्या है?
इस आसन में शरीर को कंधों के सहारे ऊपर उठाया जाता है, जिससे पूरा शरीर सीधा खड़ा जैसा हो जाता है और पैर ऊपर की ओर होते हैं।
🔶 कैसे करें? (Step-by-step)
सीधे लेट जाएं (पीठ के बल)
धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएं
कमर को हाथों से सपोर्ट दें
शरीर को सीधा रखें (कंधों पर वजन)
ठुड्डी छाती से लगाएं
30 सेकंड–2 मिनट तक रुकें
धीरे-धीरे वापस आएं
🔶 इसके फायदे (Benefits)
✔ थायरॉइड ग्रंथि को एक्टिव करता है
✔ ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है
✔ दिमाग को शांत करता है
✔ तनाव और चिंता कम करता है
✔ पाचन में सुधार
✔ नींद (Sleep) बेहतर करता है
✔ पैरों की सूजन कम करता है
🔶 कितने दिन में असर दिखता है?
5–7 दिन: हल्का रिलैक्स महसूस
10–15 दिन: ऊर्जा और नींद में सुधार
3–4 हफ्ते: शरीर में संतुलन बेहतर
🔶 किन लोगों को करना चाहिए?
जिनको तनाव/एंग्जायटी है
जिनकी नींद ठीक नहीं रहती
जिनको पाचन की समस्या है
जो फिटनेस और योग में रुचि रखते हैं
🔶 किनको नहीं करना चाहिए?
❌ हाई ब्लड प्रेशर वाले
❌ गर्दन (Neck) की समस्या वाले
❌ दिल के मरीज
❌ गर्भवती महिलाएं
❌ स्लिप डिस्क या स्पाइन समस्या वाले
🔶 सावधानियां (Important)
⚠ शुरुआत में दीवार का सहारा लें
⚠ गर्दन पर ज्यादा दबाव न डालें
⚠ खाली पेट करें
⚠ दर्द हो तो तुरंत रुक जाएं
⚠ एक्सपर्ट की सलाह से करें
🔶 Common Myths (गलत बातें)
❌ हर बीमारी का इलाज है → गलत
❌ जितना ज्यादा समय उतना अच्छा → गलत
❌ तुरंत रिजल्ट देता है → गलत
🔶 छोटा निष्कर्ष
👉 सर्वांगासन = पूरे शरीर के संतुलन और मानसिक शांति के लिए फायदेमंद
👉 लेकिन सही तरीके और सावधानी जरूरी है

किडनी फेलियर के संकेत: समय रहते पहचानें, जीवन बचाएं ‼️ किडनी हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को साफ करने...
01/04/2026

किडनी फेलियर के संकेत: समय रहते पहचानें, जीवन बचाएं ‼️

किडनी हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को साफ करने, शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने और तरल संतुलन बनाए रखने का काम करती है। जब किडनी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है, तो शरीर कुछ संकेत देने लगता है — जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।

चेहरे पर सूजन, पैरों में सूजन, बार-बार थकान महसूस होना, पेशाब में बदलाव (कम आना, झागदार या गहरा होना), भूख कम लगना या मतली, सांस लेने में तकलीफ, त्वचा का पीला पड़ना (एनीमिया) और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई — ये सभी किडनी फेलियर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

अगर समय रहते इन लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। खासकर जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या लंबे समय से दवाइयों का सेवन करना पड़ता है, उन्हें ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।

👉 याद रखें: छोटी-छोटी समस्याएं भी बड़े रोग का संकेत हो सकती हैं। समय पर जांच और सही इलाज आपकी सेहत को सुरक्षित रख सकता है।

⚠️ Disclaimer:
यह जानकारी केवल जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। यदि आपको बताए गए लक्षणों में से कोई भी अनुभव हो, तो तुरंत किसी योग्य डॉक्टर से परामर्श लें।

प्रश्न - शरोिर कितने प्रकार के होते हैं व उनके क्या-क्या कार्य है?उत्तर - तीन शरीर हैं—एक ‘स्थूल’ जो यह दीखता है। दूसरा ...
01/04/2026

प्रश्न - शरोिर कितने प्रकार के होते हैं व उनके क्या-क्या कार्य है?
उत्तर - तीन शरीर हैं—एक ‘स्थूल’ जो यह दीखता है। दूसरा पांच प्राण, पांच ज्ञानेन्द्रियां, पांच सूक्ष्म भूत और मन तथा बुद्धि इन सत्रह तत्वों का समुदाय ‘सूक्ष्मशरीर’ कहाता है। यह सूक्ष्म शरीर जन्ममरणादि में भी जीव के साथ रहता है। इसके दो भेद हैं—एक भौतिक अर्थात जो सूक्ष्म भूतों के अंशों से बना है। दूसरा स्वाभाविक जो जीव के स्वाभाविक गुण रूप हैं। यह दूसरा अभौतिक शरीर मुक्ति में भी रहता है। इसी से जीव मुक्ति में सुख को भोगता है। तीसरा कारण शरीर जिस में सुषुप्ति अर्थात् गाढ़ निद्रा होती है वह प्रकृति रूप होने से सर्वत्र विभु और सब जीवों के लिए एक है। चौथा तुरीय शरीर वह कहाता है जिसमें समाधि से परमात्मा के आनन्दस्वरूप में मग्न जीव होते हैं। इसी समाधि संस्कारजन्य शुद्ध शरीर का पराक्रम मुक्ति में भी यथावत् सहायक रहता है ।
(सत्यार्थप्रकाश नवम समुल्लास)

✨ विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत संगम! हमारे शरीर की संरचना 5 तत्वों, मन, बुद्धि और अहंकार से कैसे हुई है? जानिए 'सृष्टि-...
01/04/2026

✨ विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत संगम! हमारे शरीर की संरचना 5 तत्वों, मन, बुद्धि और अहंकार से कैसे हुई है? जानिए 'सृष्टि-तत्व और शरीर-संरचना' का पूरा विज्ञान। 🧘‍♂️
शास्त्रों के अनुसार, मूल प्रकृति सबसे पहले बुद्धि, फिर अहंकार, 5 तन्मात्राओं (सूक्ष्मभूतों), 5 ज्ञानेन्द्रियों, 5 कर्मेन्द्रियों और मन में परिवर्तित होती है। इसके बाद इन तन्मात्राओं से 5 स्थूलभूत (आकाश, वायु, तेज, जल और पृथ्वी) बनते हैं। आइए इन तत्वों के आधार पर अपने शरीर की संरचना को गहराई से समझें:
✨ जीव के 4 प्रकार के शरीर:
👁️ १. स्थूल शरीर (Physical Body): यह वह शरीर है जो हमें साक्षात दिखता है (हड्डी-मांस का बना)। इसे हम अपनी आंखों से देखते हैं, त्वचा से छूते हैं और विज्ञान (सर्जरी) भी इसे ही समझता है। यह पञ्च स्थूलभूतों से बना है।
🧠 २. सूक्ष्म शरीर (Subtle Body): यह शरीर इंद्रियों को दिखाई नहीं देता। यह अंतःकरण चतुष्टय (मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार) और 5 सूक्ष्मभूतों व 5 प्राणों का बना होता है। इसी शरीर में हमारे प्रारब्ध कर्मों का वास होता है, जिनका फल हमें इस जन्म में भोगना होता है।
🌑 ३. कारण शरीर (Causal Body): यह मूल प्रकृति का बना है और इसमें ज्ञान का अभाव होता है (जैसे गाढ़ी नींद/सुषुप्ति की अवस्था)। इसमें हमारी अतृप्त वासनाओं और संचित कर्मों का निवास होता है। इसी 'कारण देह' के चलते जीव का बार-बार जन्म होता है।
🧘‍♂️ ४. तुरीय / महाकारण शरीर (Transcendental Body): यह शरीर समाधि की अवस्था में जीव को उपलब्ध होता है। इसी चोगे से योगी परमात्मा की अनुभूति करता है (जैसे गीता में भगवान ने अर्जुन को दिव्य चक्षु दिए थे)। जब अविद्या का आवरण मिट जाता है, तो जो बचता है वह परब्रह्म स्वरूप ही है। इसीलिए उपनिषदों में कहा गया है:
"ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या, जीवो ब्रह्मैव नापरः" (ब्रह्म ही सत्य है, जगत मिथ्या है, और जीव-ब्रह्म में कोई भेद नहीं है)।
🌸 शरीर के पञ्च कोश (5 Sheaths of the Body):
योग और वेदांत के अनुसार, ध्यान और आत्मानुभूति के लिए शरीर को 5 कोशों (Sheaths) में बांटा गया है। ये सूक्ष्म से सूक्ष्मतर होते जाते हैं:
अन्नमय कोश: दृश्य शरीर (त्वचा से अस्थि तक का भाग), जिसे हम ध्यान की शुरुआत में अनुभव करते हैं।
प्राणमय कोश: पञ्च प्राण-वायुओं का बना शरीर (श्वास-प्रश्वास)।
मनोमय कोश: मन, अहंकार और कर्मेन्द्रियों का भाग (जहां संकल्प-विकल्प होते हैं)।
विज्ञानमय कोश: बुद्धि और ज्ञानेन्द्रियों का अंश (जहां विचार आते हैं)।
आनन्दमय कोश: विचारों के शांत होने पर जो गहरी शांति और आनंद मिलता है (यह कारण शरीर का हिस्सा है)।
✨ सार (Conclusion):
हम सभी इन शरीरों और कोशों का पुंज हैं, लेकिन 'जीव' (आत्मा) इन सबसे भिन्न और स्वतंत्र सत्ता वाला है। जब ध्यान (Meditation) के माध्यम से योगी अन्नमय कोश से होते हुए आनन्दमय कोश तक पहुंचता है और सभी देहों को पार कर लेता है, तब वह उस 'महाकारण' (ब्रह्म) में विलीन हो जाता है। यही मोक्ष का मार्ग है! 🙏
इस आध्यात्मिक ज्ञान को अपने मित्रों और परिजनों के साथ साझा करें।
कमेंट्स में लिखें— ।। ॐ नमो नारायण ।। या ।। शिवोहम ।। 👇

उत्थित पद्मासन
01/04/2026

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थायराइड की समस्या
01/04/2026

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हलासन
01/04/2026

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