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🚨 मंगल से जुड़े 7 ऐसे कड़वे सच… जो ज्यादातर लोगों को देर से पता चलते हैंबीमारी, गुस्सा, करियर, पैसा.. सब पर असर।इसे नजरअ...
20/02/2026

🚨 मंगल से जुड़े 7 ऐसे कड़वे सच…
जो ज्यादातर लोगों को देर से पता चलते हैं
बीमारी, गुस्सा, करियर, पैसा.. सब पर असर।
इसे नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। 🔻

➊ कब मंगल कमजोर होता है
➤ नीच राशि में हो
➤ सूर्य के बहुत पास हो (अस्त / combust)
➤ शनि से पीड़ित हो
➤ ऐसे घर में हो जहां उसकी ताकत दब जाती है
उदाहरण:
• काम शुरू होते ही रुक जाना
• छोटी बात बड़ी टक्कर बन जाना
• जमीन या घर से जुड़े मामले अटकना
सही कारण जानने के लिए पूरी कुंडली देखना जरूरी है (D1/D9)

➋ शरीर पहले संकेत देता है
➤ बार-बार बुखार या शरीर गरम रहना
➤ त्वचा पर फोड़े या जलन
➤ कान की परेशानी
➤ खून, पथरी या बवासीर जैसी समस्या
उदाहरण:
इलाज करवाने के बाद भी छोटी-छोटी समस्या बार-बार लौट आना

➌ मूंगा
➤ सही व्यक्ति के लिए फायदा, गलत के लिए नुकसान
➤ दिन: मंगलवार
➤ समय: सूर्यास्त के आसपास
➤ लाल मूंगा धारण किया जाता है
उदाहरण:
किसी को मूंगा पहनने से आत्मविश्वास और काम बढ़ता है,
किसी को बेचैनी या परेशानी महसूस होने लगती है

➍ जड़ी-बूटी उपाय
➤ अनंतमूल की जड़ लाल धागे में बांधें
➤ मंगलवार को दाहिने हाथ में पहनें
उदाहरण:
जिन लोगों को शरीर में ज्यादा गर्मी या बेचैनी रहती है, उन्हें राहत मिल सकती है

➎ दान.. मंगल शांत करने का प्रमुख उपाय
➤ मंगल से जुड़े नक्षत्र में करना श्रेष्ठ
मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा
दान की वस्तुएं:
➤ लाल मसूर दाल
➤ लाल कपड़ा
➤ लाल फल
➤ चीनी

➏ मंगल मजबूत हो तो काम किस दिशा में जाता है
➤ निर्माण, प्रॉपर्टी, मशीन, धातु
➤ सेना, पुलिस, इंजीनियरिंग
➤ सर्जरी या जोखिम वाले काम
उदाहरण:
ऐसे लोग कठिन या खतरनाक काम से पीछे नहीं हटते

➐ मूल सिद्धांत
🔴 प्रबल मंगल → हिम्मत, जमीन, सफलता
🔴 कमज़ोर मंगल → दुर्घटना, विवाद, अचानक परेशानी

⚠️ सबसे जरूरी सलाह
कोई भी उपाय शुरू करने से पहले पूरी कुंडली का विश्लेषण जरूर कराएं।
सही उपाय रास्ता खोलता है.. गलत उपाय समस्या बढ़ा सकता है।
मंगल को समझना मतलब अपनी ऊर्जा को सही दिशा देना।

📌 ऐसे ही कम सुने गए, गहरे ज्योतिष रहस्य पढ़ने के लिए फॉलो करें..

Disclaimer: Educational use only. Excerpts belong to their respective authors and publishers. Interpretations do not imply endorsement. Jyotish uses simplified concepts that may not reflect your full birth chart. Refer to original texts for accuracy; a full chart analysis is recommended.


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With Chandan Gupta – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
20/02/2026

With Chandan Gupta – I just got recognized as one of their top fans! 🎉

सभी ग्रह और उनसे संबंधित होने वाली बीमारियां रोग ...सूर्य ग्रह से रोग"""""""""""""""""सूर्य ग्रहों का राजा है इसलिए यदि ...
16/02/2026

सभी ग्रह और उनसे संबंधित होने वाली बीमारियां रोग ...

सूर्य ग्रह से रोग
"""""""""""""""""
सूर्य ग्रहों का राजा है इसलिए यदि सूर्य आपकी कुंडली में बलवान है तो आपकी आत्मा बलवान होगी।आप शरीर की छोटी-मोटी व्याधियों पर ध्यान नहीं देंगे।परन्तु यदि सूर्य अच्छा नहीं है तो सर्व प्रथम आपके बाल झड़ेंगे। सर में दर्द आए दिन होगा और आपको दर्द निवारक दवा का सहारा लेना ही पड़ेगा।

चन्द्र ग्रह से मानसिक रोग
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चन्द्र संवेदनशील लोगों का अधिष्ठाता ग्रह होता है। यदि चन्द्र कमजोर है तो मन कमजोर होगा और आप भावुक अधिक होंगे। कठोरता से आप तुरंत प्रभावित हो जाएंगे और सहनशक्ति भी कम होगी। इसके बाद सर्दी जुकाम और खांसी कफ जैसी व्याधियों से जल्दी प्रभावित हो जाएंगे। उपाय यह है कि संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में न आएं, क्योंकि आपको भी संक्रमित होने में देर नहीं लगेगी। चन्द्र अधिक कमजोर होने से सर्दी से पीड़ित होंगे। चन्द्र के कारण स्नायुतंत्र भी प्रभावित होता है।

मंगल ग्रह और सुस्त व्यक्ति
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मंगल रक्त का प्रतिनिधित्व करता है परन्तु जिनका मंगल कमजोर होता है रक्त की बीमारियों के अतिरिक्त जोश की कमी होगी। ऐसे व्यक्ति हर काम को धीरे धीरे करेंगे। वह जातक सुस्त दिखाई देगा और किसी भी काम को सही ऊर्जा से नहीं कर पाता। खराब मंगल से चोट चपेट और दुर्घटना आदि का भय बना रहता है।

बुध ग्रह से दमा और अन्य रोग
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बुध व्यक्ति को चालाक और धूर्त बनाता है।आज यदि आप चालाक नहीं हैं तो दुसरे लोग आपका हर दिन लाभ उठाएंगे।जो भोले भाले लोग होते हैं उनका बुध अवश्य ही कमजोर होता है और खराब बुध से व्यक्ति को चर्म रोग अधिक होते हैं। सांस की बीमारियां बुध के दूषित होने से होती हैं। बहुत खराब बुध से व्यक्ति के फेफड़े खराब होने का भय रहता है। व्यक्ति हकलाता है तो भी बुध के कारण और गूंगा बहरापन भी बुध के कारण ही होता है।

ब्रहस्पति ग्रह और मोटापा
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गुरु यानी ब्रहस्पति व्यक्ति को बुद्धिमान बनाता है परन्तु पढ़े लिखे लोग यदि मूर्खों जैसा व्यवहार करें तो समझ लीजिए कि व्यक्ति का गुरु कुंडली में खराब है। गुरु सोचने समझने की शक्ति को प्रभावित करता है। जातक जडमति हो जाता है। इसके साथ ही गुरु कमजोर होने से पीलिया या पेट के अन्य रोग होते हैं।गुरु यदि दुष्ट ग्रहों से प्रभावित होकर लग्न को प्रभावित करता है तो मोटापा देता है। अधिकतम लोग जो शरीर से काफी मोटे होते हैं उनकी कुंडली में गुरु की स्थिति कुछ ऐसी ही होती है।

शुक्र

13/02/2026
।।ॐ सूर्याय नमः ।।।। कुंभ संक्रांति 2026 का राशिफल ।। ।। सूर्य का शनि की राशि में प्रवेश — अनुशासन, कर्म और परिणाम का सम...
13/02/2026

।।ॐ सूर्याय नमः ।।

।। कुंभ संक्रांति 2026 का राशिफल ।।

।। सूर्य का शनि की राशि में प्रवेश — अनुशासन, कर्म और परिणाम का समय ।।

13 फरवरी 2026 को सूर्य देव मकर से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं।

इस दिन सुबह 04:14 बजे सूर्य देव मकर राशि से कुंभ राशि में गोचर (प्रवेश) करेंगे।

स्नान-दान का शुभ समय (पुण्य काल) सुबह 07:01 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा।

यह फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पड़ रही है।

कुंभ शनि की राशि है, इसलिए यह गोचर आत्मबल (सूर्य) और कर्मफल (शनि) की संयुक्त परीक्षा का काल माना जाता है।

इस अवधि में अहंकार टूटता है, वास्तविकता सामने आती है और व्यक्ति को अपने कर्मों का परिणाम स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है।

यह समय दिखावे से अधिक मेहनत, शॉर्टकट से अधिक धैर्य और भाग्य से अधिक कर्म को महत्व देने वाला रहेगा।

जिनकी राशि पर सूर्य भारी पड़ेगा उन्हें तुरंत उपाय करना चाहिए।

अगले 30 दिन जीवन की दिशा बदल सकते हैं।

।। बारह राशियों का राशिफल ।।

।। मेष राशि ।।

सूर्य 11वें भाव (आय स्थान) में प्रवेश करेगा और 5वें भाव पर दृष्टि डालेगा।

नई आय के अवसर बनेंगे, अचानक धन लाभ के योग हैं। नौकरी में वेतन वृद्धि या लाभ संभव है।

छात्रों का मन पढ़ाई से भटक सकता है।

बड़े भाई या मित्रों से विवाद से बचें।

सट्टा या जोखिम निवेश भारी नुकसान करा सकता है।

।। वृषभ राशि ।।

सूर्य 10वें भाव (कर्म स्थान) में रहेगा और 4थे भाव पर दृष्टि करेगा।

करियर में बड़ा बदलाव या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। पद और अधिकार बढ़ेंगे।

तकनीकी क्षेत्र वालों को विशेष लाभ मिलेगा।

माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

ऑफिस में महिला सहकर्मी से विवाद से बचें।

।। मिथुन राशि ।।

सूर्य 9वें भाव में और 3रे भाव पर दृष्टि देगा।

भाग्य में उतार-चढ़ाव रहेगा। लंबी यात्राएं होंगी।

पिता या गुरु से विचारों का टकराव संभव है।

भाई-बहनों से सहयोग मिलेगा।

धार्मिक कार्यों में दिखावा हानि देगा। यात्रा में दस्तावेज संभालकर रखें।

।। कर्क राशि ।।

सूर्य 8वें भाव में और 2रे भाव पर दृष्टि करेगा।

अचानक स्वास्थ्य समस्या या धन हानि संभव है।

जॉब ट्रांसफर या अचानक बदलाव हो सकता है।

वाणी पर नियंत्रण रखें, परिवार में कटुता बढ़ सकती है।

वाहन सावधानी से चलाएं।

।। सिंह राशि ।।

सूर्य 7वें भाव में और लग्न पर दृष्टि करेगा।

व्यक्तित्व प्रभावशाली बनेगा, लोग प्रभावित होंगे।

पार्टनरशिप बिजनेस में विस्तार संभव है।

जीवनसाथी से अहंकार टकराव हो सकता है।

पुरानी बातें उजागर हो सकती हैं, पारदर्शिता रखें।

।। कन्या राशि ।।

सूर्य 6ठे भाव में और 12वें भाव पर दृष्टि करेगा।

शत्रुओं पर विजय मिलेगी, कोर्ट केस में राहत संभव।

त्वचा या एलर्जी की समस्या हो सकती है।

नया कर्ज लेने से बचें।

गुप्त विरोधियों से सावधान रहें।

।। तुला राशि ।।

सूर्य 5वें भाव में और 11वें भाव पर दृष्टि करेगा।

क्रिएटिव क्षेत्र में नाम मिलेगा।

प्रेम संबंधों में भ्रम या गलतफहमी बढ़ेगी।

विद्यार्थियों की एकाग्रता कमजोर होगी।

शेयर बाजार में लालच नुकसान देगा।

।। वृश्चिक राशि ।।

सूर्य 4थे भाव में और 10वें भाव पर दृष्टि करेगा।

घर, संपत्ति या वाहन खरीद के योग बनेंगे।

घर में खर्च बढ़ेगा, इलेक्ट्रॉनिक सामान पर धन लगेगा।

काम का दबाव बढ़ेगा पर सम्मान भी बढ़ेगा।

ऑफिस का तनाव घर में न लाएं।

।। धनु राशि ।।

सूर्य 3रे भाव में और 9वें भाव पर दृष्टि करेगा।

आत्मविश्वास बढ़ेगा, साहसिक निर्णय सफल होंगे।

मीडिया, कम्युनिकेशन, आईटी क्षेत्र वालों को लाभ।

छोटी यात्राओं से बड़ा फायदा।

छोटे भाई-बहनों से विवाद से बचें।

।। मकर राशि ।।

सूर्य 2रे भाव में और 8वें भाव पर दृष्टि करेगा।

धन संचय में बाधा आएगी, खर्च बढ़ेंगे।

पारिवारिक व्यवसाय में तनाव संभव।

खान-पान से स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।

निवेश से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।

।। कुंभ राशि ।।

सूर्य लग्न में और 7वें भाव पर दृष्टि करेगा।

ऊर्जा बढ़ेगी लेकिन मानसिक भ्रम भी रहेगा।

नया बिजनेस शुरू करने का अवसर।

सिरदर्द और आंखों की समस्या हो सकती है।

वैवाहिक जीवन में धैर्य आवश्यक।

।। मीन राशि ।।

सूर्य 12वें भाव में और 6ठे भाव पर दृष्टि करेगा।

विदेश यात्रा या विदेशी संपर्क से लाभ।

अस्पताल या चिकित्सा खर्च बढ़ सकता है।

अकेलेपन की भावना बढ़ेगी।

गुप्त संबंध बदनामी दे सकते हैं। कानूनी मामलों से दूर रहें।

।। किन्हें उपाय करना चाहिए ।।

जिन राशियों को यह गोचर चुनौती दे रहा है वे प्रतिदिन प्रातःकाल तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और काले तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें और मंत्र जप करें:

ॐ घृणि सूर्याय नमः।

रविवार को मंदिर में तांबे का बर्तन या गेहूं दान करें।

ग्रहों की चाल परिस्थितियां बनाती है, लेकिन कर्म और साधना परिणाम बदलते हैं।

कुंडली विश्लेषण के लिए संपर्क कर सकते हैं।
सूर्य नारायण की जय।
Astro Ajeet Rupa Modi
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इस समय राहु बुध का गोचर कुंभ राशि में हुआ है अति उत्तम है मिथुन राशि वालों के लिए नई जॉब के अवसर धार्मिक यात्राएं  नया ब...
09/02/2026

इस समय राहु बुध का गोचर कुंभ राशि में हुआ है अति उत्तम है मिथुन राशि वालों के लिए नई जॉब के अवसर धार्मिक यात्राएं नया बिजनेस स्टार्ट कर सकते हैं शेयर मार्केट के लिए भी अच्छा है
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With Narendra Modi – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
09/02/2026

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मंगल+शनि योगफल तथा उपाय〰️〰️🔸〰️🔸🔸〰️🔸〰️〰️कुंडली में शनि मंगल का योग करियर के लिए संघर्ष देने वाला होता है करियर की स्थिरता...
08/02/2026

मंगल+शनि योगफल तथा उपाय
〰️〰️🔸〰️🔸🔸〰️🔸〰️〰️
कुंडली में शनि मंगल का योग करियर के लिए संघर्ष देने वाला होता है करियर की स्थिरता में बहुत समय लगता है और व्यक्ति को बहुत अधिक पुरुषार्थ करने पर ही करियर में सफलता मिलती है शनि मंगल का योग व्यक्ति को तकनीकी कार्यों जैसे इंजीनियरिंग आदि में आगे ले जाता है और यह योग कुंडली के शुभ भावों में होने पर व्यक्ति पुरुषार्थ से अपनी तकनीकी प्रतिभाओं के द्वारा सफलता पाता है, शनि मंगल का योग यदि कुंडली के छटे या आठवे भाव में हो तो स्वास्थ में कष्ट उत्पन्न करता है शनि मंगल का योग विशेष रूप से पाचनतंत्र की समस्या, जॉइंट्स पेन और एक्सीडेंट जैसी समस्याएं देता है।

मंगल ग्रह युवा, चुस्त, बलिष्ठ, छोटे कद वाला, रक्त-गौर वर्ण, पित्त प्रकृति, शूरवीर, उग्र, रक्त नेत्र वाला, और गौरवशाली ग्रह है। इसके विपरीत शनि दुर्बल, लंबा शरीर, रूखे बाल, मोटे दांत और नाखून वाला, दुष्ट, क्रोधी, आलसी और वायु प्रकृति वाला ग्रह है। कुंडली में बलवान शनि सुखकारी तथा निर्बल या पीड़ित शनि कष्टकारक और दुखदायी होता है। इन विपरीत स्वभाव वाले ग्रहों का योग स्वभावतः भाव स्थिति संबंधी उथल-पुथल पैदा करता है। सभी ज्योतिष ग्रंथों ने इस योग का फल बुरा ही बताया है। कुछ आचार्यों ने इसे ‘द्वंद्व योग’ की संज्ञा दी है। ‘द्वंद्व’ का अर्थ है लड़ाई। यह योग लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में होने पर मंगल दोष को अधिक अमंगलकारी बनाता है जिसके फलस्वरूप जातक के जीवन में विवाह संबंधी कठिनाइयां आती हैं। विवाह के रिश्ते टूटते हैं, विवाह देर से होता है, विवाहोत्तर जीवन अशांत रहता है, तथा विवाह विच्छेद तक की स्थिति पैदा हो जाती है।

फलदीपिका’ ग्रंथ (अ. 18.3) के अनुसार: दुःखार्तोऽसत्य संधः ससवितृ तनये भूिमजे निन्दिश्च। अर्थात् ‘‘मंगल-शनि साथ हों तो व्यक्ति दुःखी, झूठ बोलने वाला, अपने वचन से फिर जाने वाला और निंदित होता है।’’ ‘सारावली’ ग्रंथ (अ. 15.6) के अनुसार: धात्विन्द्रजाल कुशल प्रवन्चक स्तेय कर्म कुशलश्च। कुजसौरयोर्विधर्मः शस्त्रविषघ्नः कलिरूचिः स्यात्।। अर्थात, ‘‘ कुंडली में मंगल और शनि एक साथ होने पर जातक धातुविशेषज्ञ, धोखेबाज, लड़ाकू, चोर, शस्त्राघाती तथा विष संबंधी ज्ञान रखता है। ‘जातक भरणम्’ (द्विग्रह योगाध्याय, श्लोक-15) के अनुसार: शस्त्रास्त्र वित्संगर कर्मकर्ता स्तेयानृतप्रीतिकरः प्रकामम्। सौरव्येन हीनो नितरां नरः स्याद्ध रासुते मन्दयुतेऽतिनिन्द्यः।। अर्थात्, ‘‘जिसके जन्म समय मंगल और शनि का योग हो, वह अस्त्र-शस्त्र चलाने वाला, चोरी में तत्पर, मिथ्या बोलने वाला और सुख हीन होता है।

‘मानसागरी’ ग्रंथ (द्विग्रहयोग शनि-मंगल द्वंद्व योग फल) अनुसार: वाग्मीन्द्रजालदक्षश्च विधर्मी कलहप्रियः। विषमद्य प्रपंचाढ्यो मंदमंगल संगमे।। अर्थात्, ‘‘मंगल-शनि के योग से व्यक्ति वक्ता तथा इंद्रजाल विद्या में निपुण, धर्महीन, झगड़ालू, विष तथा मदिरा के प्रपंच से युक्त होता है।

‘होरासार’ ग्रंथ (अ. 23.19) के अनुसार: कुजमन्दयास्तु योगे नित्यार्तो वातपित्त रोगाभ्याम्। उपचय भवने नैव नृपतुल्यो लोक संपतः स्यात्ः।। अर्थात्, ‘‘मंगल और शनि की एक भाव में युति वात (गठिया) और पित्त रोग देती है। परंतु उपचय (3, 6, 10,11) भाव में यह युति जातक को सर्वमान्य बनाती है और राज सम्मान देती है। ज्ञातव्य है कि पापी ग्रह उपचय भाव में शुभ फल देते हैं।

‘संकेतनिधि’ ग्रंथ (संकेत IV.66) के अनुसार। द्यूने यमेऽसृजि तदीक्षणतश्च वातार्ता। चंचला सरूधिरा कटि चिन्ह युक्ता।। अर्थात् ‘‘यदि शनि-मंगल सातवें भाव में हों या वहां दृष्टिपात करें तब पत्नी अस्थिर बुद्धि और वात रोग से ग्रस्त होती है। उसको रूधिर की अधिकता होती है और उसके कटि प्रदेश में चिह्न होता है।

ज्योतिष का हर जानकार शनि ग्रह को धरती पर होने वाली सभी बुरी घटनाओ का प्रतीक व कारक मानता हैं संसार मे होने वाले कष्ट , दुख , संताप , मृत्यु , अपंगता, विकलता , दुष्टता ,पतन , युद्ध , क्रूरता भरे कार्य , अव्यवस्था, विद्रोह इत्यादि का कारक ग्रह यह शनि ही माना जाता हैं किसी की भी कुंडली मे इसकी स्थिति बहुत महत्व रखती हैं जैसे यह कहा जा सकता हैं की दूसरे भाव मे शनि वैवाहिक जीवन व धन हेतु अशुभ होता हैं जबकि चतुर्थ भाव मे यह कष्टपूर्ण बचपन का प्रतीक बनता हैं इसी प्रकार दशम भाव का शनि पाप प्रभाव मे होने से अपनी दशा मे जातक को ऊंचाई से गिराता हैं अथवा ऊंचे पद से धरातल मे ले आता हैं | इस शनि का सूर्य चन्द्र से सप्तम मे होना हमेशा बुरे परिणाम देता हैं वही गुरु के साथ होने पर यह शनि गुरु दशा मे परेशानी अवश्य प्रदान करता हैं।

इसी प्रकार मंगल ग्रह को धरती पर होने वाले विस्फोटो , हमलो , अग्निकांडों , युद्धो , भूकंपो इत्यादि का कारक माना जाता हैं जातक विशेष की पत्रिका मे यह मंगल दोष के अतिरिक्त कुछ अन्य भावो मे भी हानी ही करता हैं जैसे तृतीय भाव मे यह भात्र सुख मे कमी प्रदान कर अत्यधिक साहसी प्रवृति देता हैं तथा पंचम भाव मे यह तुरंत निर्णय लेने की घातक सोच प्रदान करता हैं।

हमारे ज्योतिष शास्त्रो मे शनि मंगल के संबंध वाले जातक के विषय निम्न बातें कही गयी हैं “ऐसा जातक वक्ता , जादू जानने वाला, धैर्यहीन, झगड़ालू , विष व मदिरा बनाने वाला, अन्याय से द्रव प्राप्ति करने वाला, कलहप्रिय , सुख रहित , दुखी निंदित ,झूठी प्रतिज्ञा करने वाला अर्थात झूठा होता हैं | हमने अपने अध्ययन मे काफी हद तक यह बातें सही पायी हैं इसके अतिरिक्त भी कुछ अन्य बातें हमें अपने इस अध्ययन के दौरान प्राप्त हुयी।

इन दोनों ग्रहो का एक अजीब सा रिश्ता हैं मंगल जहां शनि के घर मे ऊंच का होता हैं वही शनि मंगल के घर मे नीच का हो जाता हैं यह दोनों एक मात्र ऐसे ग्रह हैं जो समसप्तक हुये बिना भी एक दूसरे से दृस्टी संबंध बना सकते हैं। ऐसे मे इन दोनों ग्रहो की युति अथवा दृष्टि जातक विशेष की कुंडली मे क्या परिणाम देती हैं आइए कुछ कुंडलियो द्वारा जानने का प्रयास करते हैं।

1👉 यह संबंध जातक विशेष को आत्महत्या करने पर मजबूर करता हैं। उदाहरण के लिए निम्न कुण्डलिया देखी जा सकती हैं।

👉 श्री राम जी की कर्क लग्न की पत्रिका मे शनि और मंगल (सप्तमेश-अष्टमेश व पंचमेश-कर्मेश ) की लग्न व दशम भाव पर दृस्टी हैं जिनके मिले जुले प्रभावों से सभी जानते हैं की श्री राम ने जलसमाधि लेकर आत्महत्या करी थी।

👉 29/4/1837 को मिथुन लग्न मे जन्मे इस ने जातक फ्रांसीसी सेना मे जनरल के पद पर रहते हुये फ्रांस के युद्धो मे बहुत नाम कमाया था 1889 मे इन्हे शत्रुतापूर्ण कारवाई के चलते पद से हटा दिया गया 1890 मे इनकी पत्नी की भी मृत्यु हो गयी जिससे निराश होकर इन्होने 30/9/1891 मे आत्महत्या कर ली थी | इनकी पत्रिका मे भी मंगल शनि का दृस्टी संबंध हैं।

👉 हिटलर (20/4/1889) तुला लग्न की इस पत्रिका मे शनि मंगल का दृस्टी संबंध हैं जो सप्तमेश चतुर्थेश का संबंध हैं जिससे हिटलर को सिंहासन व पद प्राप्ति की अदम्य असंतुष्टि की भावना प्राप्त हुई और वह अपनी तानाशाही प्रवृति की और उन्मुख होकर विश्व मे विवादित व्यक्ति के रूप मे जाना गया इन्ही ग्रहो के लग्न पर प्रभाव ने उसे आत्महत्या करने को मजबूर किया।

इन सभी उदाहरणो से यह स्पष्ट हो जाता हैं की शनि मंगल का संबंध सच मे ही एक विध्वंशक संबंध हैं जो कुंडली मे जातक विशेष के अतिरिक्त धरती पर भी अपना विध्वंशक प्रभाव ही देता हैं।

शनि को कार्य के लिये और मंगल को तकनीक के लिये माना जाता है। शनि का रंग काला है तो मंगल का रंग लाल है,दोनो को मिलाने पर कत्थई रंग का निर्माण होजाता है। कत्थई रंग से सम्बन्ध रखने वाली वस्तुयें व्यक्ति स्थान पदार्थ सभी शनि मंगल की युति में जोडे जाते है। शनि जमा हुआ ठंडा पदार्थ है तो मंगल गर्म तीखा पदार्थ है,दोनो को मिलाने पर शनि अपने रूप में नही रह पाता है जितना तेज मंगल के अन्दर होता है उतना ही शनि ढीला हो जाता है।

इस बात को रोजाना की जिन्दगी में समझने के लिये घर मे बनने वाली आलू की सब्जी के लिये सोचिये,आलू की सिफ़्त शनि में जोडी जाती है कारण जमीन के अन्दर से यह सब्जी उगती है जड के रूप में इसका आस्तित्व है,जब निकाला जाता है तो जमा हुआ पानी और अन्य पदार्थों का मिश्रण होता है। यह सूर्य की गर्मी से सड जाता है इसके लिये इसे कोड स्टोरेज में रखा जाता है और समय पर निकाल कर इसे प्रयोग में लाया जाता है,सब्जी बनाते वक्त इसे छिलके को निकाल कर मिर्च मशाले आदि के साथ सब्जी के रूप में पकाया जाता है जितनी गर्मी इसे दी जायेगी उतना ही पतला यह पक जायेगा,लेकिन अपने अन्दर के पानी के अनुसार ही यह ढीला या कडक बनेगा,भोजन के समय इसे प्रयोग करने पर अपने रूप परिवर्तन से आराम से खाया जा सकता है। अगर इसे गर्म नही किया जाये तो यह पकेगा नही और कसैला स्वाद देगा और खाया भी नही जायेगा। सीधे आग में डालने पर यह जल जायेगा,फ़्लेम वाली आग में यह पकेगा नही,जितनी मन्दी आग से इसे पकाया जायेगा उतना ही स्वादिष्ट बनेगा।

दूसरा उदाहरण मंगल की भोजन में प्रयोग की जाने वाली मिर्च से भी लिया जाता है,जब मिर्च अधिक हो जाती है तो शरीर के अन्दर जमा हुआ कफ़ जो शनि के द्वारा पैदा किया जाता है पिघलना शुरु हो जाता है,जितनी अधिक मिर्च खायी जाती है उतना अधिक कफ़ शरीर से पिघलना शुरु हो जाता है,यहां तक कि अगर अधिक मिर्ची खायी जाये तो शरीर में जलन पैदा हो जाती है,शरीर में वसा के रूप में जमा शनि का पदार्थ पिघल कर आन्सू की रूप में कफ़ के रूप में नाक के रूप में पेशाब के समय चर्बी के रूप में मल को पतला करने के बाद दस्त के रूप में निकल जायेगा,अधिक मिर्च के प्रयोग करने पर यह शरीर की रक्षा के रूप में उपस्थित और सर्दी गर्मी से शरीर को बचाने वाले पदार्थ को शरीर से निकाल कर बाहर कर देगी। उसी प्रकार से धीमी आंच पर रखा हुआ पानी भी भाप की शक्ल में बर्तन से विलीन हो जायेगा। यह मंगल की सिफ़्त है। एक बात और भी मानी जाती है कि शनि का स्थान गन्दी जगह पर होता है और मंगल का स्थान गर्म जगह पर होता है,जिन जातकों की कुंडली में शनि मंगल की युति होती है उनका खून किसी न किसी प्रकार के इन्फ़ेक्सन से युक्त होता है।

शनि के अन्दर एक बात और देखी जाती है कि वह जड है उसे कोई भान नही है,जैसे सूर्य देखने की क्षमता रखता है चन्द्र सोचने की क्षमता को रखता है मंगल हिम्मत को दिखाने की क्षमता को रखता है बुध गन्द को सूंघने की क्षमता को रखता है,गुरु सुनने और काम शक्ति के विकास की क्षमता को रखता है शुक्र स्पर्श से समझने की क्षमता का रूप होता है,राहु आकस्मिक घटना को देने की ताकत को रखता है तो केतु स्वभाव से ही सहायता के लिये सामने होता है,लेकिन शनि जड है उसे जैसा साधनों से बनाया जाता है वैसा ही वह बन जाता है। मंगल के साथ तकनीकी कारण से शनि जमे हुये कार्य को पिघलाने का काम करता है। शनि पत्थर है और उसे लाल रंग से रंग दिया जाये तो वह धर्म के रूप में बन जायेगा,शनि चोर है तो मंगल सिपाही है। शनि पत्थर है तो मंगल लोहा है,इसलिये ही शनि के लिये लोहे का छल्ला पहिना जाता है। रिस्तो मे देखा जाये तो शनि कर्म है मंगल भाई है,शनि दुख है तो मंगल भाई का दुख है,शनि खेती का काम है तो मंगल मशीनरी है,शनि जेल है तो मंगल उसका प्रहरी है,शनि विदेशी है तो मंगल उसे कन्ट्रोल करने वाला है,शनि कोयला है तो मंगल तपती हुई आग है,शनि कमजोर है तो मंगल उसके अन्दर शक्ति को देने वाला है,शनि डाकू है तो मंगल उसकी उसकी साहस की सीमा है,शनि बुजुर्ग दार्शनिक है तो मंगल उसके तामसिक विचार है,शनि कब्रिस्तान है तो मंगल जलती हुई आग है,शनि खंडहर है तो मंगल उसके अन्दर तपती हुयी रेत है,शनि बाल है तो मंगल उसे काटने वाला नाई है,शनि लकवा है तो मंगल गर्म सेंक है,शनि फ़ोडा है तो मंगल आपरेशन है,शनि कर्म है तो मंगल रसोई है,शनि मधुमक्खी है तो मंगल उसके अन्दर का जहर है,शनि आलू का पकौडा है तो मंगल उसके अन्दर मीठी चटनी है। शनि काम करने वाले कर्मचारी है तो मंगल कार्य स्थल की रखवाली करने वाला गार्ड है। शनि घर है तो मंगल उसका दरवाजा है। मंगल खून चोट चेचक अपेन्डिक्स हार्निया देता है तो शनि वात लकवा ह्रदय की बीमारी ट्यूमर ब्रांकाइटिस की बीमारी देता है।

मंगल शनि की युति में कार्य तकनीकी होते है मशीन के कार्य भी होते है,व्यापारिक राशि तुला में अगर युति है तो मारकेटिंग की क्षमता भी होती है,एम बी ए आदि करने के बाद बाजार का तकनीकी ज्ञान भी होता है। शनि कार्य होता है तो मंगल कार्य में संघर्ष भी देता है,एक भाई को कष्ट जरूर होता है,मंगल युवा होता है और शनि उसे बुजुर्ग जैसे कष्ट भी देता है,शनि कार्य है तो मंगल उत्तेजना में उसे बदलने का रूप भी बन जाता है। शत्रु अधिक होते है और किसी प्रकार से चन्द्रमा सामने हो तो नाक पर गुस्सा करने वाला व्यक्ति भी होता है। मंगल शनि के साथ वक्री हो तो उत्साह में कमी होती है,काम शक्ति निर्बल होती है,शनि मंगल के साथ वक्री हो तो अधिकार को प्राप्त करने की जल्दबाजी होती है और वह अधिकार भले ही खास आदमी की मौत करनी पडे लेकिन अधिकार जल्दी से लेने में दिक्कत नही होती है।

मंगल शनि की दशा में तीन महिना पहले से और तीन महिना बाद तक तथा बीच के एक महिना में घोर कष्ट भुगतने पडते है। शनि में मंगल की दशा में उन्नीस महिने का घोर कष्ट होता है। शनि मंगल के साथ होने पर जातक को बहुत मेहनत के बाद ही सफ़लता मिलती है,हर काम में असन्तोष होता है,वह अपने तकनीकी कारणॊ से ऊंची पदवी वाले लोगो से अनबन ही रखता है,साथ ही गलतफ़हमी का शिकार भी होता रहता है,कार्य भी अक्सर चलते हुये अपने आप बन्द हो जाते है अगर जातक नौकरी करता है तो इन्ही कारणो से उसे बार बार कार्य बदलने पडते है,किसी के कार्य से उसे सन्तोष होता ही नही है। यह युति अगर तीन सात या ग्यारह में चन्द्रमा के साथ होती है तो जातक को नौकरी में परेशानी होती है जीवन साथी की नाक पर गुस्सा होता है और इसी कारण से वैवाहिक जीवन और नौकरी दोनो ही परेशानी में होती है,जीवन साथी को बीमारियों की बजह से और नौकरी को तकनीकी कमियों से परेशान होने के लिये भी जाना जाता है। धन हानि भी होती है,नौकरी करने में परेशानी भी होती है,व्यापार आदि में कठिनायी भी होती है। अगर यह युति ग्यारहवे भाव में है और राहु छठे भाव में है तो जातक को कार्य के अन्दर बहाने बनाने की आदत होती है साथ ही वह आंख बचाकर काम करने वाला होता है,छठे से छठा कर घर कार्य में चोरी की आदत भी देता है और जातक को किसी न किसी बात पर अचानक धन का मुआवजा देने या पुलिस आदि में रिपोर्ट होने तथा परेशान होने की बात भी मिलती है।

शनि-मंगल दोषमुक्ति के लिए उपाय
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यदि कुंडली के किसी भी भाव में शनि मंगल एक साथ हों तो सबसे पहले ये देखना चाहिए कि दोनों में से शुभ कौन है तथा अशुभ कौन। इसे सरल बनाने के लिए ऐसे पता करें।

यदि शनि अपनी मित्र राशियों- वृषभ, मिथुन, कन्या में हो या अपनी स्वः राशी मकर/कुम्भ में हो या अपनी उच्च राशि तुला में हो तब शनि शुभ होगा तथा मंगल अशुभ। इस स्थिति में मंगल के उपाय करने चाहियें।

इसी प्रकार यदि मंगल अपनी मित्र राशियों- सिंह, धनु, मीन में हो या अपनी स्वः राशियों मेष/वृश्चिक में हो या अपनी उच्च राशी मकर में हो तब यहां शनि के उपाय करने चाहिए।

यहां भी 2 प्रकार का भेद होता है। मकर शनि की स्वः राशि है तथा मंगल की उच्च राशी। यदि यह योग मकर राशि में कुंडली के छठे आठवें या बाहरनवे भाव में बन रहा हो तब शनि मंगल दोनों की वस्तुओं का दान करना चाहिए अन्यथा नहीं। क्योंकि कुंडली के अन्य भावों में यह योग शुभफल दाई होता है। और जो योग या ग्रह शुभ फल दाई हों उनका दान करने से उनकी शुभता में कमी आती है।
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08/02/2026

सूर्य अष्टम भाव में जीवन की रक्षा करता है
अचानक दुर्घटना से बचाता है
पाप ग्रह की दृष्टि नहीं होनी चाहिए
इस पर गुरु की दृष्टि हो तो ऐसे लोग मरने के बाद अपनी छाप छोड़ देते हैं
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