28/03/2026
जीवनभर बच्चों को पढ़ाया, अंत में भी सीख दे गए, अंगदान कर गए
चित्तौड़ के 62 वर्षीय शिक्षक कन्हैयालाल आनंद ने जीवनभर बच्चों को पढ़ाया, वे अपने अंतिम समय में दूसरों को जीवन देने की सीख दे गए। उनके ब्रेन डेड घोषित होने के बाद उनकी इच्छानुसार परिजनों ने उनके अंग उदयपुर के गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में दान कर दिए। अंगदान के बाद ग्रीन कॉरिडोर बनाकर उनकी दोनों किडनियों को उदयपुर से हवाई मार्ग से जयपुर के एसएमएस अस्पताल भिजवाया गया, जबकि आंखों को उदयपुर में आई बैंक सोसायटी को दिया गया है। इस दौरान माहौल अत्यंत भावुक हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने कन्हैयालाल आनंद अमर रहें के नारे लगाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। जीएमसीएच के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ. हरप्रीत सिंह ने समय पर सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण कराने में अहम सहयोग प्रदान किया। हॉस्पिटल की ऑर्गन ट्रांसप्लांट टीम में डॉ. गोविन्द मंगल, डॉ. निलेश भटनागर, डॉ. विनोद मेहता, डॉ. ऋषि मेहता, डॉ. करुणा शर्मा (नोडल ऑफिसर, ऑर्गन ट्रांसप्लांट), डीएमएस हर्षा सोनी तथा ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर राजेश मेहता के नेतृत्व में अंगदान की प्रक्रिया पूरी हुई।
समाजसेवा में सक्रिय थे, हॉस्पिटल प्रबंधन ने जताया परिवार का आभार कन्हैयालाल के बेटे राहुल ने बताया कि उनके पिता समर्पित शिक्षक होने के साथ समाज सेवा में भी सक्रिय थे। वे जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते थे। जीएमसीएच के सीईओ श्री ऋषि कपूर ने हॉस्पिटल परिवार की ओर से अंगदाता और उनके परिजनों को नमन करते हुए इस पुनीत कार्य के लिए आभार व्यक्त जताया। अंगदान को समय पर जयपुर भिजवाने में के लिए डिविजनल कमिश्नर, आईजी, एसपी, सीएमएचओ, चिकित्सा विभाग तथा ट्रैफिक कंट्रोल टीम का धन्यवाद ज्ञापित किया। बता दें कि कन्हैयालाल 19 मार्च को हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। उनहें 23 मार्च को ब्रेन डेड घोषित किया गया।