Shiv Parvati Hospital Udgir

Shiv Parvati Hospital Udgir Shiv Parvati Hospital - Your Health, Our Priority!

Located in front of Axis Bank, Degloor Road, Udgir, we’re dedicated to providing compassionate care with the latest medical technology.

22/03/2026
4kg normal delivery  Hospital
21/03/2026

4kg normal delivery
Hospital

14/03/2026

हमारे पास एक मरीज डिलीवरी के लिए आई, जिसने पूरे गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच नहीं कराई थी। मरीज का वजन लगभग 96 किलो था और हाथ-पैर व चेहरे पर काफी सूजन थी। जांच के दौरान उसका ब्लड प्रेशर लगभग 180/100 पाया गया, जो कि सामान्य से काफी अधिक था।

उसे आँखों से ठीक से देखने में भी परेशानी हो रही थी। ऐसी स्थिति को सीवियर प्री-एक्लेम्प्सिया कहा जाता है, जिसमें मरीज को झटके (fits) आने का खतरा रहता है और माँ व बच्चे दोनों के लिए जोखिम बढ़ जाता है।

ऐसी स्थिति में नॉर्मल डिलीवरी सुरक्षित नहीं होती, इसलिए तुरंत सी-सेक्शन करके माँ और बच्चे दोनों को सुरक्षित बचाया गया।

👉 गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच (Antenatal Checkups) बहुत जरूरी होती है। समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह से ऐसी गंभीर स्थितियों से बचा जा सकता है।

12/03/2026

एक मरीज 2 महीने की प्रेग्नेंसी के साथ स्पॉटिंग और पेट दर्द की शिकायत लेकर आई थी। जांच के दौरान स्कैन में पता चला कि बच्चा यूट्रस में नहीं था बल्कि फैलोपियन ट्यूब में ठहर गया था। इसे एक्टोपिक प्रेग्नेंसी कहा जाता है।

दुर्भाग्यवश ट्यूब में बढ़ने के कारण वह रप्चर (फट) हो गया, जिससे पेट के अंदर काफी खून जमा हो गया और मरीज की हालत गंभीर हो गई। तुरंत मरीज को ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर सर्जरी की गई और समय रहते उपचार कर मरीज की जान बचाई गई।

⚠️ ध्यान रखें:
अगर प्रेग्नेंसी के दौरान पेट में तेज दर्द, स्पॉटिंग या ब्लीडिंग हो रही हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का संकेत हो सकता है।

अगर समय रहते पता चल जाए और मरीज की स्थिति स्थिर हो, तो कई मामलों में मेडिकल मैनेजमेंट से ट्यूब को बचाया जा सकता है, जिससे भविष्य में प्रेग्नेंसी की संभावना बनी रहती है।

समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी है।

📞 अपॉइंटमेंट बुक करण्यासाठी संपर्क करा: 8390131325 | 9975468007
📧 ईमेल: nbawgel58@gmail.com
🏥 पत्ता: शिव पार्वती हॉस्पिटल, अँबेस बँकेच्या समोर, देगलूर रोड, उदगीर – ४१३५१७

11/03/2026

एक पेशेंट बहुत ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या के साथ हमारे पास आई। जांच करने पर पता चला कि यह इनकम्प्लीट अबॉर्शन के कारण हो रहा था। लगातार ब्लीडिंग होने से उनका हीमोग्लोबिन बहुत कम होकर लगभग 6 ग्राम रह गया था और मरीज शॉक की स्थिति में जा रही थी।

तुरंत इलाज करते हुए उन्हें ऑपरेशन थिएटर में लेकर प्रक्रिया की गई और कई यूनिट ब्लड ट्रांसफ्यूजन दिया गया। समय पर उपचार मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकी।

⚠️ याद रखें:
अगर प्रेग्नेंसी के दौरान या उसके बाद अचानक ज्यादा ब्लीडिंग हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बहुत जरूरी है।

समय पर इलाज से गंभीर स्थितियों से बचा जा सकता है।

📞 अपॉइंटमेंट बुक करण्यासाठी संपर्क करा: 8390131325 | 9975468007
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🏥 पत्ता: शिव पार्वती हॉस्पिटल, अँबेस बँकेच्या समोर, देगलूर रोड, उदगीर – ४१३५१७

09/03/2026

अक्सर महिलाएँ पूछती हैं कि गर्भाशय में फाइब्रॉइड (Fibroid) होने पर क्या गर्भधारण में समस्या आती है?

हर फाइब्रॉइड से परेशानी हो, ऐसा जरूरी नहीं है। अगर फाइब्रॉइड गर्भाशय के बाहर की तरफ होता है और गर्भाशय की अंदरूनी परत (जहाँ बच्चा ठहरता है) सामान्य है, तो आमतौर पर प्रेग्नेंसी पर इसका कोई असर नहीं पड़ता।

लेकिन कुछ फाइब्रॉइड गर्भाशय के अंदर की तरफ होते हैं, जो भ्रूण के इम्प्लांटेशन में बाधा डाल सकते हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह के अनुसार उन्हें निकालना पड़ सकता है।

इसलिए हर फाइब्रॉइड का इलाज एक जैसा नहीं होता।
फाइब्रॉइड का स्थान, आकार और लक्षण देखकर ही सही उपचार तय किया जाता है।

अगर आपको फाइब्रॉइड से जुड़ी कोई समस्या है, तो घबराएँ नहीं — सही जांच और विशेषज्ञ की सलाह से उचित उपचार संभव है।

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07/03/2026

काही महिलांमध्ये योनीमार्गातून गर्भाशय खाली येणे किंवा बाहेर पडणे ही समस्या दिसून येते. याला गर्भाशय प्रोलॅप्स असे म्हणतात.
ही समस्या प्रामुख्याने मेनोपॉजनंतर, पेल्विक मसल्स कमकुवत होणे, वारंवार प्रसूती, क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन किंवा जास्त वजन उचलणे यामुळे उद्भवू शकते.

गर्भाशय प्रोलॅप्सचे वेगवेगळे ग्रेड असतात. सुरुवातीच्या अवस्थेत विशेष व्यायाम, लाइफस्टाइल बदल आणि योग्य आहार यामुळे आराम मिळू शकतो.
परंतु गंभीर अवस्थेत शस्त्रक्रिया (सर्जरी) आवश्यक ठरू शकते.

महिलांनी अशी लक्षणे दिसल्यास लाज न बाळगता तज्ज्ञ डॉक्टरांचा सल्ला घ्यावा. योग्य वेळी उपचार केल्यास ही समस्या सहज नियंत्रणात आणता येते.

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06/03/2026

काही महिलांना हसताना, खोकताना किंवा शिंकताना नकळत लघवी जाण्याची समस्या जाणवते. याला Stress Urinary Incontinence असे म्हणतात. ही समस्या प्रामुख्याने प्रसूतीनंतर, विशेषतः दीर्घकाळ चाललेल्या लेबर पेन किंवा नॉर्मल डिलिव्हरीनंतर दिसू शकते.

योग्य व्यायाम, जीवनशैलीत बदल आणि तज्ञ डॉक्टरांच्या मार्गदर्शनाने ही समस्या नियंत्रणात आणता येते. काही प्रकरणांमध्ये छोट्या शस्त्रक्रियेच्या मदतीनेही प्रभावी उपचार शक्य आहेत.
लक्षणे दिसल्यास लाज न बाळगता तज्ञांचा सल्ला घ्या आणि योग्य उपचार घ्या.

📞 अपॉइंटमेंटसाठी संपर्क: 8390131325 / 9975468007
📧 ईमेल: nbawge158@gmail.com
🏥 पत्ता: शिव पार्वती हॉस्पिटल, ॲक्सिस बँकेच्या समोर, देगलूर रोड, उदगीर – 413517

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