24/02/2026
गर्भसंस्कार आयुर्वेद में एक ऐसी पवित्र और वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से गर्भावस्था के दौरान माँ के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि शिशु का समग्र (शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक) विकास उत्तम हो। इसमें संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, योग-प्राणायाम, ध्यान, सकारात्मक संगीत, मंत्र श्रवण और सत्वगुणी विचारों का अभ्यास कराया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार गर्भ में शिशु माँ की भावनाओं और वातावरण से प्रभावित होता है। सही देखभाल से स्वस्थ, बुद्धिमान और संस्कारी संतान की संभावना बढ़ती है। गर्भसंस्कार माता-पिता दोनों की सक्रिय भागीदारी पर आधारित एक समग्र परंपरा है।