05/02/2026
मनोचिकित्सा है,आज की स्वास्थ्य चर्चा का विषय। होम्योपैथी संसार की पहली मनोचिकित्सा प्रणाली है। जहां औषधीयियों के द्वारा मनोचिकित्सा संभव है।
हमारा मानव शरीर मुख्य रूप से तीन तरह के आयामो से निर्मित है है।
माइंड,mind
बॉडी, Boy
और सोल Soul
अर्थात मन शरीर और आत्मा ।।
मन के दो आयम हैं।
१-चेतन मन और conscious mind
२-उपचेतन मन sub conscious mind
शरीर जो अनेक प्रकार के क्रियाशील अंगों से संचालित होता है, जिसमें मस्तिष्क की क्रियाशीलता सबसे प्रमुख है। यहां मन का एक तीसरा आयाम भी है, जिसे सुपर चेतन मन कहते हैं। इसकी चर्चा करना समीचीन नहीं है।
हमारा मन सामान्य तौर पर दैनिक चेतना के साथ जुड़ा हुआ है। हमारे प्रतिदिन की क्रियाकलाप हमारी सामान्य चेतना का हिस्सा है, जिसमें हम अपने सामान्य भौतिक जीवन को प्रतिदिन जीते हैं।
खाना, पीना, भोजन, सोचना, विचारणा, दैनिक जीवन में भूत भविष्य और वर्तमान की चिंताएं, जीवन जीने के तमाम सारे जुगाड़। इन सब के बारे में हम अपनी योजनाएं बनाते रहते हैं, और उसी के अनुसार अपने जीवन के क्रियाकलाप भी करते हैं।
चेतन मन के सकारात्मक और नकारात्मक दो पक्ष होते हैं। हम किसी विषय के बारे में जब नकारात्मक भाव से सोचते हैं या सकारात्मक भाव से सोचते हैं, तब हमारा उपचेतन मन इस तरह के भावों के आधार पर क्रियाशील होता है।
जब हम नकारात्मक भाव से सोचते हैं, तो सब कॉन्शियस माइंड नकारात्मक भावों को ग्रहण कर लेता है। और उसके अनुसार क्रियाशील हो जाता है।
जब हम सकारात्मक भाव से सोचते हैं तो हमारा उपचेतन मन उसे सकारात्मक भाव एवं सोच में ग्रहण करता है।
मनोवैज्ञानिक चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण तरीका है।
आत्म उपचार की सकारात्मक सलाह, स्वयं के लिए स्वयं के द्वारा ।
यह स्वयं के द्वारा दी गई सकारात्मक सलाह हमें हमारे उपचेतन मन को सकारात्मक उपचार का संदेश देती है, शरीर की उपचारक प्रक्रियाओं को तेज करने के लिए।
यह मनोवैज्ञानिक चिकित्सा कारगर है और इसका प्रभाव तुरंत होता है।इस चिकित्सा को
सेल्फ हीलिंग सजेशनAuto healing suggestion कहा जाता है।
यहां चेतन मन अपने उपचेतन मन को सलाह देता है। उपचेतन मन उसी सलाह के अनुसार शरीर की उपचारात्मक प्रक्रिया में लग जाता है। जिसका तुरंत प्रभाव शरीर में दिखाई पड़ने लगता है।
यदि हमारा चेतन मन बार-बार हमें नकारात्मक विचारों में ले जाता है। हम स्वयं के लिए यह नकारात्मक भाव से कहते हैं या अपने शरीर को कोशते हैं। तो हमारा उपचेतन मां नकारात्मक भावों से ग्रस्त होकर शरीर को बीमार करने लगता है।
यथा मैं बहुत बीमार हूं, मैं बहुत कमजोर हूं, मुझे बहुत तरह की बीमारियां हो गई हैं। मेरा हार्ट काम नहीं कर रहा है। मेरा लीवर काम नहीं कर रहा है। मेरा खाना पच नहीं रहा है। मुझे नींद नहीं आ रही है। मुझे शरीर में भोजन नहीं लग रहा है। पौष्टिक भोजन के बाद भी मेरा शरीर कमजोर हो रहा है । लगता है मृत्यु बहुत करीब है।आदि आदि तरह के नकारात्मक विचार हमारे उपचेतन मन को नकारात्मक भावों से भरते हैं। और शरीर ज्यादा से ज्यादा बीमार होने लगता है।
दूसरों के द्वारा अपने स्वास्थ्य के बारे में प्रकट किए गए विचार।
जैसे-आप बहुत कमजोर लग रहे हैं। आपको बुखार जैसा लग रहा है। आप बहुत सुस्त दिख रहे हैं। आपकी बीमारी तो बहुत कठिन है। अमुक बीमारी तो ठीक नहीं होती आदि। यह और भी ज्यादा खतरनाक है। इससे अपने स्वास्थ्य के प्रति नकारात्मक भाव और गहरा हो जाता है।
सकारात्मक उपचार प्रक्रिया में अपने चेतन मन को सकारात्मक भाव से भरना चाहिए और अपने उपचेतन मन को संदेश देना चाहिए कि
मैं स्वस्थ हूं। मेरा स्वास्थ्य अच्छा हो रहा है। आजकल मेरा भोजन पच रहा है। मेरी बीमारी साध्य है। मुझे एक अनुभवी अच्छा चिकित्सक मिल गया है। अमुक डॉक्टर ने कहा है कि मैं जल्दी ही ठीक हो जाऊंगा। मुझे ऐसा आभास हो रहा है कि मैं सचमुच अमुक डॉक्टर की चिकित्सा से ठीक हो रहा हूं। मैं एक अनुभवी डॉक्टर से चिकित्सा ले रहा हूं। उन्होंने बहुत सारी कठिन बीमारियां ठीक किया है और मैं जल्दी ही संपूर्ण स्वास्थ्य को प्राप्त हो जाऊंगा।
एक आसान तरीका।
प्रतिदिन रात में सोने से पहले 10 मिनट अपने शरीर के अंगों को सर से लेकर पैर तक बाह्य अभ्यंतर अपने अंगों को धन्यवाद दीजिए। और सकारात्मक भाव से अपने अंगों को निर्देश दीजिए कि वे स्वस्थ हैं और वह अपना अच्छा काम कर रहे हैं। मैं स्वस्थ हूं मेरे शरीर के सारे अंग मेरा साथ दे रहे हैं। मैं अपने शरीर के समस्त अंगों को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने हमारे जीवन को सुचारू रूप से संचालित कर रखा है।
Thanks to all your body organs for their active and healthy perfect healing.
इस 5 मिनट की क्रिया के बाद धीमी गहरी और लंबी सांसें लीजिए पेट फूलाते हुए और अपने नाभि का ध्यान कीजिए। 5 मिनट नाभि क्रिया कीजिए। नाभि का ध्यान करते हुए श्वास लीजिए और श्वास को बाहर निकलिए।
हमारी नाभि हमारा स्रोत है। हमारा अस्तित्व है। इसी नाही ने हमें माता के गर्भ में 9 महीने तक पोषण दिया था। इस अनुग्रह के लिए उसे धन्यवाद दीजिए। यही नाभि हमारी ऊर्जा विस्तार का केंद्र है।
इस सकारात्मक सजेशन के बाद आप सो जाइए। विश्वास कीजिए आपको बहुत अच्छी नींद आएगी और सुबह आप बहुत ही फुर्ती के साथ निद्रा त्याग करेंगे। और दिनभर स्वस्थ और प्रसन्न महसूस करेंगे।
डॉ एसपी मिश्र
वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक
प्रज्ञा होम्यो क्लीनिक
लंका वाराणसी