जन्म से लेकर मृत्यु तक का जीवन - मात्र इतना ही परिचय है। जन्म से लेकर मृत्यु तक की संपत्ति, सम्बन्धी, माता-पिता, पुत्रादि, और जन्म से लेकर मृत्यु तक की ही देह - यही तो bio-data है मेरा।
और तुम्हारा भी तो। आधुनिक शिक्षा ने हमारे संस्कारों, हमारी संस्कृति, हमारे धर्म, हमारे विचारों व हमारे स्वास्थ्य का हनन कर डाला है। आधुनिक शिक्षा हमारी प्रकृति को नष्ट व पृथ्वी को दूषित कर रही है। हम आज स्वधर्म क
ो समर्पित नहीं रहे। हम आज अपनी लाजवंती संस्कृति को विस्मृत कर चले। हम आज भावनाशून्य हो गए, परिणामतः विद्वतापूर्ण एक उत्तम लेखक नहीं रहे । हृदयहीन आधुनिक बौद्धिक कम्प्यूटर होते जा रहे हैं। वो गौरवपूर्ण नृत्यशैली ना रही । बालकों में वो निश्छलता व भोलापन ना रहा। दादा-दादी, नाना- नानी के घरेलू नुस्खे न् रहे, ना रही उनकी कहानियाँ, ना सुनाती है माँ माँ लोरियाँ, ना बताया जाता है कि चंदा मामा है तुम्हारा। भक्ति खो चुकी, पूजा पाठ आदि नित्यकर्म भी ना रहे, साधना, तन्त्र मन्त्र आदि के विषय से पूर्ण अनभिज्ञता हो गई। देखो आधुनिक भारतीयों व समस्त पृथ्वीपुत्रों! तुम कहाँ आ गए। आधुनिकता के फेर में तुम दुःसाध्य रोगों से पीड़ित हो गए। एलोपैथी में तुम्हारा रोग लाइलाज है। आयुर्वेद संजीवनियों लेकर प्रतीक्षा रत है। जागो पृथ्वीनन्दनों, आयुर्वेद, धर्म, प्रेम, दया, शांति, आध्यात्म व प्रकृति की ओर लौट चलो। मैं तुम्हे जगाने आई हूँ, मैं तुम्हे बुलाने आई हूँ।
पहाड़ों की परिभाषा, उदाहरण दे रही हूँ मैं ।
चले आओ पहाड़ों पर निमंत्रण दे रही हूँ मैं ।।
चले आओ पहाड़ों पर निमंत्रण दे रही हूँ मैं ।।
मेरा परिचय: पूजा बहुगुणा भण्डारी (रुद्री ऋतम्भरा), गृहस्थ साधक, प्रवचनकर्ता, प्रकृतिवाद, तन्त्र मंत्रादि की, आयुर्वेद की लेखिका, आयुर्वेदाभ्यासी !
मेरी कृति : शाबर मंत्र साधना
रोगों की औषधियाँ: मधुमेह, बवासीर, आँतों की कमज़ोरी, नाल/धरण खिसकना, दाँतों के रोग, बाल झड़ना/सफेद होना, गंजापन, पथरी, गर्भाश्य में सूजन, दमा, नजला, माइग्रेन आदि की औषधियाँ दी जाती हैं।