29/03/2024
शुक्र राशि परिवर्तन 31March 2024
प्रातः काल 6बजकर 50मिनट पर
#कुण्डली_के_बारह_भाव_में_शुक्र_का_प्रभाव :
#प्रथम_भाव_में_शुक्र_का_प्रभावः
लग्न में शुक्र की स्थिति से जातक प्रायः उत्तम कोटि के कपड़े पहनना पसंद करता है एवं रहन-सहन में नजाकता नफासत पसंद होता है ! जातक अपने सौंदर्य का विशेष ध्यान रखता है एवं सौंदर्य प्रसाधनों का शौकीन होता है ! स्त्रियों की जन्म पत्रिका में लग्नस्थ् शुक्र के प्रभाव से वह अति सुन्दर होती हैं !
वहीं शत्रु राशि में स्थित होने पर शौक श्रंगार करने व तड़क भड़क वाले कपड़े पहनने का कोई शौक नहीं होता है ! पत्नी फिर भी खूबसूरत मिलती है, परन्तु विचारों में भिन्नता हो सकती है !
#द्वितीय_भाव_में_शुक्र_का_प्रभावः
स्वभावः
द्वितीय स्थान में स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक मिष्ठान प्रिय, यशस्वी, सुखी, कलाप्रिय एवं भाग्यशाली होता है ! वह कर्त्तव्य में चतुर और अच्छा वक्ता भी होता है !
पूर्ण दृष्टिः
द्वितीय शुक्र की पूर्ण दृष्टि अष्टम भाव पर पड़ती है जिससे जातक सामान्य या गुप्त रोगी हो सकता है ! जातक कफ व वात रोगों से भी प्रभावित होता है ! शुक्र की अष्टम स्थान पर दृष्टि से जातक पर्यटनशील एवं विदेशवासी होता है !
मित्र/शत्रु राशिः
शुक्र के स्व, उच्च या मित्र राशियों में होने से जातक उत्तम सुख प्राप्त करता है ! मित्र राशियों में होने से जातक को धन, यश, लोकप्रियता व बड़े कुटुम्ब की प्राप्ति होती है ! शत्रु व नीच राशि में शुक्र के होने पर शुभ फल में न्यूनता आती है ! शत्रु राशि का शुक्र होने पर जातक का धन संचय नहीं होता ! जातक को पैतृक सम्पत्ति की प्राप्ति में भी अनेक बाधाएँ आती हैं ! जातक के पारिवारिक सुख में भी न्यूनता आती है !
भाव विशेषः
द्वितीयस्थ शुक्र के प्रभाव से जातक धन का अर्जन व बचत करता है ! जातक मित्रों के लिए हितैषी होता है ! शुक्र के प्रभाव से जातक पारिवारिक व्यवसाय को आगे बढ़ाता है ! कला के क्षेत्र में जातक प्रसिद्धि प्राप्त करता है ! प्रतिकूल प्रभाव से कुमित्रों की संगति के कारण बर्बाद हो सकता है ! जातक में धैर्य नही होता, जिससे वह बिना सोचे समझे निर्णय ल लेेता है एवं अनेक कष्ट उठाता है !
#तृतीय_भाव_में_शुक्र_का_प्रभावः
स्वभावः
तृतीय स्थान में स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक मनोरंजन प्रिय, सुखी, धनी, यात्रा प्रिय, विद्वान और कला प्रिय होता है ! जातक मिलनसार और विपरीत लिंग के व्यक्ति के प्रति सहज रूप से आकर्षित होता है ! जातक को बहनों का विशेष सहयोग मिलता है !
पूर्ण दृष्टिः
तृतीय भाव में स्थित शुक्र की पूर्ण दृष्टि नवम स्थान पर होती है जो जातक के लिए शुभ फलदायक होती है ! नवम स्थान पर शुक्र की दृष्टि से जातक सरपंच, ग्रामाधिपति व अपने कुल व समाज में उच्च पद व प्रतिष्ठान प्राप्त करता है ! जातक की धर्म के प्रति अत्यंत आस्था होती है ! जातक की कीर्ति दूर-दूर फैलती है ! रंगमंच, होटल व्यवसाय व मनोरंजन के क्षेत्र में जातक को विशेष सफलता प्राप्त होती है !
मित्र/शत्रु राशिः
मित्र, स्व व उच्च राशि में स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक का व्यक्तित्व आकर्षक होता है व उसे भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त होता है ! वह पराक्रमी एवं अपने पुरूषार्थ से सफलता प्राप्त करता है ! स्वराशि में जातक लम्बी यात्राएं अपने आनंद के लिए करता है ! शत्रु व नीच राशि में शुक्र के प्रभाव से विपरीत फल प्राप्त होता है ! जातक को भाईयों व बहनों से सहयोग नहीं मिलता ! उसमें साहस की कमी रहती है !
भाव विशेषः
तृतीय भाव भाई-बहन व पराक्रम से सम्बंध रखता है इसलिए तृतीय भाव में शुक्र की स्थिति से जातक को भाईयों विशेषकर बहनों का सुख व सहयोग प्राप्त होता है ! जातक पराक्रमी होता है एवं अपने स्वयं के पराक्रम से प्रगति करता है ! तृतीय स्थान पर शुक्र की स्थिति जातक को भाग्यशाली भी बनाती है ! जातक चित्रकारी में विशेष रूचि रखता है ! जातक को पर्यटन में विशेष आनंद आता है !
#चतुर्थ_भाव_में_शुक्र_का_प्रभाव :
स्वभावः
चतुर्थ स्थान में स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक सुखी, दीर्घायु, सुसंतानों से युक्त, साहित्य प्रेमी, धनी, यशस्वी, पुत्रवान, अपने मकान की साज-सज्जा में विशेष रुचि रखने वाला और प्रसन्नचित्त होता है ! जातक को उत्तम वाहन सुख प्राप्त होता है !
पूर्ण दृष्टिः
जातक की जन्म पत्रिका में स्थित चतुर्थ भाव के शुक्र की सप्तम दृष्टि दसवें भाव पर पड़ती है जिसके प्रभाव से जातक कला, रंगमंच, मदिरालय (बीयर बार) जुआघर (कैसिनों), सौन्दर्य प्रसाधन व स्त्री उपयोगी वस्तुओं सम्बंधी व्यापार व व्यवसाय में सफल होता है व स्थिति के अनुसार लाभ प्राप्त भी करता है !
मित्र/शत्रु राशिः
मित्र, स्व और उच्च काशि में चतुर्थस्थ शुक्र फलदायक होता है ! जमीन जायदाद, पिता, माता और वाहन का सुख जातक उत्तम प्राकार से प्राप्त करता है ! शत्रु व नीच राशि में व्यर्थ की विलासिता पूर्ण वस्तुओं में जातक अपना अर्जित धन व्यय करता है माता से विशेष प्रेम होने के बाद भी अनबन व वैचारिक मदभेद होने से माता को अपने आप बिना विचार के कष्ट होता है !
भाव विशेषः
चतुर्थस्थ शुक्र के प्रभाव से जातक के माता से अच्छे सम्बंध होते हैं एवं उसे उनका सहयोग सदैव मिलता रहता है ! चतुर्थ स्थान में शुक्र की स्थिति से जातक परोपकारी व व्यवहारकुशल होता है ! जातक पुत्रवान, सुंदर, सुखी एवं दीर्घायु होता है ! जातक को समस्त प्रकार के सुख, उच्च कोटि का मकान, श्रेष्ठ वाहन सुख एवं जमीन-जायदाद का सुख चतुर्थ स्थान में शुक्र की अच्छी स्थिति के कारण प्राप्त होता है !
#पंचम_भाव_में_शुक्र_का_प्रभावः
स्वभावः
पंचम स्थान में स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक उदार, कला प्रेमी एवं अनेक संतानों से युक्त होता है ! वह चतुर, दयालु, विद्वान, संगीत प्रेमी, स्नेही स्वभाव वाला और मधुर भाषी भी होता है !
पूर्ण दृष्टिः
पंचम स्थान स्थित शुक्र की सप्तम दृष्टि एकादश स्थान पर होती है, जिसके प्रभाव से जातक की आय में वृद्धि होती है ! जातक का स्त्रियों की सहायता से धनार्जन होता है !
मित्र/शत्रु राशिः
मित्र, स्व व उच्च राशि का शुक्र होने पर जातक को उच्च शिक्षा प्राप्त होती है ! उसे कला सम्बंधी क्षेत्रों में प्रसिद्धि मिलती है ! जातक को संतान का सुख प्राप्त होता है ! जातक विद्वान होता है ! जातक यद्यपि कि बहुत पढ़ा लिखा नही होता पर उसे विद्वानों सा आदर प्राप्त होता है ! जातक सहज और सरल होता है ! शत्रु व नीच राशि का शुक्र होने पर जातक की शिक्षा-दीक्षा में बाधाएँ आती हैं ! उसे कार्यक्षेत्र में असफलता मिलती है !
विशेषः
पंचमस्थ शुक्र के प्रभाव से जातक को परिवार से लाभ होता है ! जातक कला के क्षेत्रो में जैसे संगीत, वादन, इत्यादि में प्रसिद्ध होता है ! सुखी, भोगी एवं लाभवान होता है ! जातक दूसरों का विशेष ख्याल रखता है ! जातक न्या.वान, दानी उदार एवं सद्गुणी होता है ! जातक व्यवसायी एवं प्रतिभाशाली होता है !
#छठवे_भाव_में_शुक्र_का_प्रभावः
स्वभावः
षष्ठ स्थान में शुक्र के प्रभाव से जातक संकीर्ण मनोवृत्ति वाला होता है ! वह गुप्त रोगों से ग्रसित, स्त्री सुख से हीन और फिजूल खर्ची होता है !
पूर्ण दृष्टिः
षष्ठ स्थान पर स्थित शुक्र की पूर्ण दृष्टि द्वादश स्थान पर पड़ती है जिसके प्रभाव से जातक विवादास्पद कार्यो में व्यय करने वाला होता है ! जातक का बीमारियों में अधिक व्यय होता है !
मित्र/शत्रु राशिः
शुक्र के मित्र, स्व व उच्च राशि में होने पर जातक को मध्यम फल प्राप्त होते हैं एवं शत्रु व नीच राशि में होने से अशुभ फल की प्राप्ति होती है ! मित्र राशि में शुक्र के होने पर जातक को मामा पक्ष से लाभ होता है ! जातक के अनेक मित्र होते हैं ! शत्रु राशि के शुक्र से जातक को लाभ होता है ! जातक दुखी एवं अस्वस्थ रहता है ! जातक को गुप्तरोगी, मूत्ररोग व वीर्य सम्बंधी रोग हो सकते हैं !
भाव विशेषः
षष्ठ भाव में स्थित शुक्र को प्रभाव से जातक वैभवहीन व दुखी होता है ! जातक के शत्रु नही होते और यदि होते हैं तो वह जातक से पराजित होते हैं ! जातक स्त्री के प्रति आकर्षित होता है किंतु उसे उसकी पत्नी का सुख पूर्ण प्राप्त नही होता है ! जातक दुराचारी भी हो सकता है एवं अनैतिक कार्यों मे संलग्न रहता है ! स्त्रियों में गर्भाशय सम्बंधी कष्ट होते हैं !
#सप्तम_भाव_में_शुक्र_का_प्रभावः
स्वभावः
सप्तम भाव में स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक स्नेही, धनी, सौंदर्य प्रेमी और सुखी होता है ! जातक सुखी वैवाहिक जीवन वाला, साहित्य प्रेमी, जीवन के सभी सुखों का आनंद उठाने वाला होता है ! जातक के अनेक मित्र होते हैं और वह मिलनसार होता है ! सप्तम भाव में शुक्र के प्रभाव से जातक बुद्धिमान, चंचल और वह (विपरीत लिंग के अनुसार) स्त्री या पुरुष प्रेमी भी होता है !
पूर्ण दृष्टिः
शुक्र की पूर्ण दृष्टि लग्न पर होती है जिसके प्रभाव से जातक सुन्दर, भाग्यवान, चतुर, भोग-विलास में रुचि रखने वाला और विपरीत लिंग के व्यक्ति की ओर विशेष आकर्षण रखता है !
मित्र/शत्रु राशिः
मित्र, स्व व उच्च राशि में स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक का स्वतंत्र व्यवसाय होता है ! स्त्री राशि का होने पर स्त्री जातक अति सुंदर होती है ! जातक को व्यापार व व्यवसाय दोनों से ही लाभ होता है, परन्तु साझेदारी में प्रायः हानि उठाना पड़ता है ! शत्रु व नीच राशि का शुक्र होने पर जातक चरित्रवान होता है और उसे शत्रुओं से कष्ट उठाने पड़ते हैं ! जातक को स्त्री से सुख में भी कमी-आती है !
भाव विशेषः
सप्तम स्थान के शुक्र की स्थिति से जातक का स्वतंत्र व्यवहार और किसी के दबाव में न रहने का स्वभाव होता है ! जातक सुंदर, आकर्षक व्यक्तित्व और सेक्स के प्रति अधिक रुचि रखता है ! जातक बुद्धिमान, सहज, धैर्यवान और दूसरो के सहज ही मोहित कर लेता है ! जातक उदार और लोकप्रिय होता है ! जातक का भाग्योदय विवाह के बाद होता है ! जातक भाग्यवान, विलासी एवं चंचल होता है !
#अष्टम_भाव_में_शुक्र_का_प्रभावः
स्वभावः
अष्टम भाव में स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक कामी स्वभाव का और गुप्त कार्यों में रत रहने वाला होता है ! जातक आलसी होता है पर प्रसिद्धि प्राप्त करता है ! प्रेम सम्बंधों में जातक को प्रायः असफलता प्राप्त होती है ! जातक की रुचि आध्यात्म, तंत्र, मंत्र और गुप्त विद्याओं में होती है !
पूर्ण दृष्टिः
द्वितीय स्थान पर स्थित शुक्र की पूर्ण दृष्टि द्वितीय भाव पर पड़ती है जिसके प्रभाव से जातक परिवार का सुख और धन धान्य को प्राप्त करता है ! जातक क्रोधी एवं निर्दयी भी होता है !
मित्र/शत्रु राशिः
स्व, मित्र एवं उच्च राशियों में अष्टम भाव में शुक्र जातक को सुखी, धनी तथा सहज बनाता है ! जातक का जीवन साथी उससे पूरा सहयोग करता है ! जीतक दीर्घायु होता है ! शत्रु व नीच राशि का शुक्र होने पर जातक को आर्थिक और शारीरिक कष्ट होते हैं ! जातक को व्यवसाय में अव्यवस्था तथा अस्थिरता होती है !
भाव विशेषः
अष्टम भाव स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक ज्योतिष विद्या के प्रति अध्ययनरत रहता है ! जातक मनस्वी होता है ! जातक का परस्त्री से सम्बंध व आकर्षण रहता है ! अष्टम शुक्र जातक को निर्दयी रोगी एवं दुखी बनाता है ! जातक की पर्यटन में विशेष रूचि होती है !
ाव_में_शुक्र_का_प्रभावः
स्वभावः
नवम भाव में स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक आस्तिक, गुणी और मनोरंजन प्रिय होता है ! वह यशस्वी, प्रतिभाशाली, उदार एवं सबके प्रति सहानुभूति रखता है ! जातक आशावादी और सर्वसुख प्राप्त करने वाला होता है ! जातक बुद्धिमान, चंचल और भाग्यशाली होता है !
पूर्ण दृष्टिः
नवम भाव में स्थित शुक्र की तृतीय स्थान पर पूर्ण दृष्टि के प्रभाव से जातक महत्वाकाँक्षी, अधिक बहनों वाला, सुखी तथा पराक्रमी होता है !
मित्र/शत्रु राशिः
स्व, मित्र एवं उच्च राशियों में स्थित शुक्र जातक के लिए शुभ फलदायक होता है ! जातक का विवाह के बाद भाग्योदय होता है ! व्यवसाय के लिए महिलाओं सें जातक को विशेष सहयोग प्राप्त होता है ! शत्रु एवं नीच राशिगत नवम शुक्र जातक को भाग्यहीन बनाता है ! जातक को सुख प्राप्त नहीं होता !
भाव विशेषः
जातक नवमस्थ शुक्र के प्रभाव से अत्यंत आशावादी, उच्चाधिकारियों का कृपापात्र और सुखी वैवाहिक जीवन व्यतीत करने वाला होता है ! जातक का भाग्य पूर्ण रूप से उसका साथ देता है ! जातक को नवमस्थ शुक्र के प्रभाव से पत्नी एवं सम्बंधियो द्वारा धन प्राप्त होता है। विदेश से व्यापारिक सम्बंधो से विशेष लाभ होता है ! कलात्मक और साहित्यिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है ! जातक आस्तिक, दयालु, गुणी होता है एवं तीर्थ यात्राएँ करता हैं !
्थान_में_शुक्र_का_प्रभाव :
स्वभावः
दशम भाव में स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक विद्वान और तर्क वितर्क में कुशल होता है ! जातक मातृ पितृ भक्त, धार्मिक कार्यो में रुचि रखने वाला, विलासी, भाग्यशाली, पराक्रमी, गुणी, दयालु, न्यायप्रिय, धनी और सम्पत्ति से युक्त होता है !
पूर्ण दृष्टिः
चतुर्थ स्थान में स्थित शुक्र की पूर्ण दृष्टि चतुर्थ भाव पर पड़ती है जिसके प्रभाव से जातक सुखी होता है ! जातक को माता का उत्तम सुख व कृपा प्राप्त होती है ! जातक उत्तम प्रकार के भवन व वाहन का सुख प्राप्त करता है।
मित्र/शत्रु राशिः
स्व, मित्र और उच्च राशि में स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक की उन्नति होती है ! स्त्रियों से विशेष कर माता से जातक को धन की प्राप्ति अवश्य होती है ! स्त्री राशि में होने पर जातक का भाग्योदय विवाह के बाद होता है ! जातक स्वयं के व्यवसाय से लाभ प्राप्त करता है ! शत्रु व नीच राशि का शुक्र स्त्रियों द्वारा धनहानि करवाता है ! जातक कई प्रकार के व्यवसाय करना पसंद करता है ! सभी व्यवसायों में जातक को सफलता प्राप्त नही होती ! जातक के पिता से तनावपूर्ण सम्बंध होते हैं !
भाव विशेषः
दशमस्थ शुक्र जातक के राज्य भाव में वृद्धि करता है ! व्यापार व व्यवसाय में स्त्रियों से व स्त्रियों द्वारा लाभ होता है ! जातक को व्यवसाय में अपनी माता से भी सहायता प्राप्त होती है ! सौंदर्य प्रसाधन, अभिनय, इत्यादि सम्बंधी कार्यो में जातक को विशेष सफलता प्राप्त होती है !
#शुक्र_का_ग्यारहवे_भाव_में_प्रभाव :
स्वभावः
ग्यारहवें स्थान में शुक्र के प्रभाव से जातक गुणवान, धनवान, यशस्वी, पुत्रवान, प्रभावशाली, उदार कलाप्रिय और मित्रों से युक्त होता है ! जातक ईश्वर से प्रीति रखने वाला और भौतिक जीवन में सफल होता है !
पूर्ण दृष्टिः
एकादश स्थान पर शुक्र की पूर्ण दृष्टि पंचम स्थान पर पड़ती है, जिसके प्रभाव से जातक संतान और विद्या से परिपूर्ण और कई पुत्रों का पिता होता है ! जातक गुणवान होता है !
मित्र/शत्रु राशिः
मित्र, स्व व उच्च राशि का शुक्र जातक के लिए उन्नति दायक और आय को बढ़ाने वाला होता है ! जातक की आय व खर्च दोनों ही अधिक होते हैं ! जातक अनुशासित जीवन व्यतीत करता है ! शत्रु व नीच राशि में शुक्र होने से आय और यश दोनों में न्यूनता होती है ! जातक अनावश्यक खर्च करता है ! मित्रों से जातक को हानि उठानी पड़ती है !
भाव विशेषः
एकादश भाव स्थित शुक्र जातक को स्थिर लक्ष्मीवान बनाता है ! जातक धनवान, परोपकारी एवं लोकप्रिय होता है ! जातक विलासी एवं कामी भी होता है ! जातक को पुत्र सुख प्राप्त होता है ! जातक को कर्म क्षेत्र में महिला पक्ष का विशेष सहयोग मिलता है, जिससे आय के क्षेत्र में विशेष उन्नति होती है ! ग्यारहवें स्थान में स्थित शुक्र के प्रभाव से कला के विभिन्न क्षेत्रों से जातक धनार्जन करता है ! लेखन, कविता लेखन, पाठन, व्यंगकार, नाटक तथा अभिनय में रुचि रखने वाला होता है ! प्रायः अभिनेता, अभिनेत्री, फिल्म निर्माता तथा इस क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों की पत्रिका में एकादश शुक्र होता है ! प्रायः अभिनेता, अभिनेत्री, फिल्म निर्माता तथा इस क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों की पत्रिका में एकादश भाव में शुक्र होता है ! श्वेत वस्तुओं तथा रत्नों के व्यापार से भी जातक को लाभ होता है !
#द्वादश_भाव_में_शुक्र_का_प्रभाव :
स्वभावः
द्वादश भाव में स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक अत्यंत विलासी पर भाग्यशाली होता है ! जातक मनोरंजन ओर स्त्रियों पर व्यय करता है ! जातक अत्यंत धनी होता है ! साहसी और नित्य नये कार्य करना चाहता है !
पूर्ण दृष्टिः
द्वादश भाव पर स्थित शुक्र की पूर्ण दृष्टि छठे स्थान पर पड़ने से जातक भाग्यशाली एवं शत्रुओं पर विजय पाने वाला होता है ! जातक गुप्त रोगी और वीर्य विकारी होता है !
मित्र/शत्रु राशिः मित्र, स्व व उच्च राशि का शुक्र शुभ फलदायक हो सकता है ! जातक को धन, यश और अन्य सुख प्राप्त होता है ! शत्रु व नीच राशि में शुक्र होने पर जातक गरीब, कामी व्यवसायी, दुर्बुद्धि और स्वार्थी होता है ! उसकी आय से व्यय अधिक होता है ! अतः वह जमीन में कई प्रकार के कष्ट उठाता है !
भव विशेषः
द्वादश भाव में स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक राजा के समान उच्च अधिकार प्राप्त होता है ! धन, मान सम्मान आदि प्रचुर मात्रा में जातक को प्राप्त होता है ! जातक क्षणिक आवेश में बिना सोचे समझे कार्य करता है अतः मानसिक तनाव रहता है ! सेक्स में जातक विशेष रुचि रखता है ! जातक व्यसनी होता है ! जातक कटुभाषी, अविश्वासी एवं आलसी भी होता है
Acharya Bhaskar Shukla
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